मुंबई। भारतीय शेयर बाजार ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत जोरदार बढ़त के साथ की। लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने हरे निशान में कारोबार शुरू किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी 50 में भी मजबूत तेजी देखने को मिली।
पिछले सप्ताह शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था। इससे पहले गुरुवार को निफ्टी 50 22,421.95 अंक पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों की खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती दी।
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले कुछ सप्ताह काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट दर्ज की गई थी। बाजार के इतिहास में यह गिरावट का असामान्य रूप से लंबा दौर रहा।
सोमवार की मजबूत शुरुआत ने फिलहाल इस सिलसिले पर ब्रेक लगा दिया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ एक कारोबारी सत्र की तेजी को ट्रेंड में बदलाव नहीं माना जा सकता। आने वाले सत्रों में विदेशी निवेशकों की गतिविधि, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बाजारों का रुख अहम रहेगा।
घरेलू बाजार को सबसे बड़ा सहारा वैश्विक संकेतों से मिला है। अमेरिका के हालिया रोजगार आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं। इसके बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है।
बाजार में इस संभावना पर भी चर्चा है कि अक्टूबर में फेड की ओर से आक्रामक दर बढ़ोतरी की आशंका अब काफी कम हो गई है। इससे उभरते बाजारों में निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है और भारतीय बाजार को भी इसका फायदा मिला।
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी सकारात्मक संकेत है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 0.6 फीसदी गिरकर 101.6 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई बढ़ने और जी-7 देशों की ओर से तेल भंडार जारी किए जाने की खबरों से निकट अवधि में सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आम तौर पर राहत देने वाली होती है।
एशिया के अन्य प्रमुख शेयर बाजारों में भी मजबूती का असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर दिखाई दिया।
हालांकि बाजार की इस तेजी के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने लगातार छठे कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाली की।
गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 9,484 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 10,042 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
यानी विदेशी फंडों की बिकवाली के सामने घरेलू संस्थागत निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। बाजार की मौजूदा तेजी को टिकाऊ बनाने के लिए आने वाले दिनों में FPI के रुख पर नजर रहेगी।
इस बीच शेयर बाजार में HDFC Bank भी निवेशकों के रडार पर रहेगा। बैंक ने अनूप बागची को तीन साल के कार्यकाल के लिए नया मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नियुक्त किया है।
बागची फिलहाल ICICI Prudential Life Insurance के एमडी और सीईओ हैं। यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि HDFC Bank के इतिहास में पहली बार किसी बाहरी उम्मीदवार को बैंक के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है।
इस बदलाव के बाद बैंक के शेयर में निवेशकों की गतिविधि पर भी बाजार की नजर रहेगी।
सोमवार की तेजी से निवेशकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन बाजार के सामने अभी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
अगर विदेशी बिकवाली कम होती है और तेल की कीमतों में और नरमी आती है तो भारतीय शेयर बाजार की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। फिलहाल आठ सप्ताह की गिरावट के बाद आई तेजी ने निवेशकों के सेंटीमेंट को जरूर बेहतर किया है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल बाजार से जुड़ी जानकारी और समाचार अपडेट के उद्देश्य से है। इसे किसी भी तरह की निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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