INDIA गठबंधन की महारैली में वोट चोरी और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का हमला, मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की उठाई मांग, तेजस्वी यादव ने भी केंद्र सरकार को घेरा
नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन की महारैली के दौरान विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की विदाई का दावा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश 2027 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।
रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। नेताओं ने कथित वोट चोरी, चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार को घेरा।
रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परिवर्तन कभी भी आ सकता है और विपक्ष ने कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाकर सच्चाई सामने रखी है।
अखिलेश यादव ने कहा, “बीजेपी हमेशा-हमेशा के लिए जाने वाली है। उत्तर प्रदेश बीजेपी की विदाई तय करेगा।”
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अखिलेश के इस बयान को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों और विपक्ष की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने रैली के मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अंगद के पैर वाले बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर जमीन ही नहीं बचेगी तो पैर कहां रखेंगे।
सपा प्रमुख ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की हल्दी घाटी बताते हुए दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐसी विदाई होगी कि पार्टी दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाएगी।
उनके बयान से साफ है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी में है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली में केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
खरगे ने कहा, “मोदी को हटाएंगे, संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र को बचाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष केंद्रीय जांच एजेंसियों से डरने वाला नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग पर पीछे नहीं हटेगा।
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ये सभी आरोप विपक्षी नेताओं ने रैली के दौरान लगाए हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए।
तेजस्वी ने महाभारत के शकुनी का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं न्याय नहीं कर रही हैं।
रैली में इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं की एकजुटता देखने को मिली। हालांकि, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों और मांगों को विपक्ष का राजनीतिक पक्ष मानते हुए संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी रैली में केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का दर्जा बराबर होता है और एक वोट इस बराबरी का महत्वपूर्ण आधार है।
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि मुसलमानों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और गरीब मजदूरों को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ता है। उन्होंने नागरिक अधिकारों और समानता के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
रामलीला मैदान में आयोजित महारैली में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेता मंच पर पहुंचे।
सभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग, कथित वोट चोरी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका प्रमुख मुद्दे रहे।
विपक्षी दलों ने इन मुद्दों के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। वहीं, अखिलेश यादव के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी इस रैली के केंद्र में ला दिया है।
रामलीला मैदान की महारैली में अखिलेश यादव का बीजेपी की विदाई का दावा उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और समाजवादी पार्टी बीजेपी के खिलाफ विपक्षी लामबंदी को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
रैली में उठाए गए मुद्दों का राजनीतिक असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, विपक्ष ने वोट चोरी के आरोपों, चुनाव आयोग की भूमिका और संविधान की रक्षा को अपनी राजनीतिक मुहिम का प्रमुख आधार बनाया है।
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