बजट 2026 आयकर कानून
नई दिल्ली: भारत का संघ बजट 2026-27 ऐसे वक्त पर आ रहा है, जब करोड़ों करदाता एक बड़े बदलाव के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने वाला है, जिसे दशकों में टैक्स सिस्टम का सबसे बड़ा ओवरहॉल माना जा रहा है। ऐसे में 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश होने वाले बजट से लोगों को साफ मैसेज, स्थिरता और थोड़ी राहत की उम्मीद है, ताकि पुराने सिस्टम से नए ढांचे में जाना आसान हो सके।
नया आयकर कानून, 1961 के पुराने एक्ट की जगह लेगा। इसमें धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है और कानून की भाषा भी काफी आसान बनाई गई है। शब्दों की संख्या लगभग आधी कर दी गई है, ताकि आम टैक्सपेयर्स को समझने में परेशानी न हो। इस बार ‘पिछला वर्ष’ और ‘निर्धारण वर्ष’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ की नई अवधारणा लाई गई है, जिससे सालों से चला आ रहा कन्फ्यूजन खत्म होने की उम्मीद है। साथ ही डिजिटल और फेसलेस असेसमेंट को और बढ़ावा दिया गया है।
मध्यम वर्ग की नजरें इस बजट पर खास तौर पर टिकी हुई हैं। बजट 2025 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री किया गया था। अब उम्मीद की जा रही है कि बजट 2026 में सैलरीड क्लास को और राहत मिले। लोग स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने, हेल्थ इंश्योरेंस जैसी कटौतियों में ज्यादा छूट और महंगाई को देखते हुए टैक्स स्लैब में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े स्लैब बदलाव की संभावना कम है। सरकार का फोकस नए कानून में स्मूद ट्रांजिशन, आसान कंप्लायंस और बेकार प्रावधानों को हटाने पर रह सकता है। कुल मिलाकर, यह बजट ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने और टैक्सपेयर्स का भरोसा मजबूत करने का मौका माना जा रहा है।
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