नई दिल्ली: 15 अगस्त भारत के इतिहास की सबसे अहम तारीखों में से एक है। यह दिन करीब दो सदियों के ब्रिटिश शासन के अंत, लंबे स्वतंत्रता संघर्ष और अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और इसके साथ देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी नई यात्रा शुरू की। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य बना।
भारत में ब्रिटिश सत्ता के विस्तार में 1757 की प्लासी की लड़ाई को महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इस युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत के बाद बंगाल में उसका प्रभाव बढ़ा और धीरे-धीरे भारत के बड़े हिस्से पर ब्रिटिश नियंत्रण मजबूत होता गया।
करीब एक शताब्दी तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में शासन किया। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन ने भारत का प्रशासन सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद अंग्रेजी शासन से आजादी की मांग धीरे-धीरे एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेने लगी।
20वीं सदी में स्वतंत्रता आंदोलन ने व्यापक रूप लेना शुरू किया। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और जनभागीदारी को आंदोलन का आधार बनाया। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देशभर में जनसमर्थन को मजबूत किया।
वहीं, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस और कई अन्य क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने संघर्ष और बलिदान से आजादी की लड़ाई को नई धार दी।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी। इसी दौर में भारत को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया तेज हुई। 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत में सत्ता का हस्तांतरण कर देगी।
इसी बीच भारत के विभाजन का मुद्दा भी तेजी से सामने आया। राजनीतिक मतभेदों और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने विभाजन की योजना को स्वीकार कर लिया।
3 जून 1947 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की योजना पेश की। इसके आधार पर ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया।
इस अधिनियम के तहत ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन, भारत और पाकिस्तान में बांट दिया गया। विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ा। इस दौरान व्यापक हिंसा हुई और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि में ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ और भारत स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। इसी ऐतिहासिक मौके पर जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ दिया। वह स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।
आजादी का यह क्षण लंबे संघर्ष के बाद आया था। इसलिए 15 अगस्त केवल सत्ता हस्तांतरण की तारीख नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले असंख्य लोगों के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक भी बन गया।
आजादी के बाद से स्वतंत्रता दिवस का मुख्य राष्ट्रीय समारोह दिल्ली के लाल किले पर आयोजित होता है। प्रधानमंत्री यहां तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं।
समारोह में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों की भागीदारी होती है। इसके अलावा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए देश की विविधता और संस्कृति को प्रदर्शित किया जाता है। इनमें स्कूली बच्चों और कलाकारों की भी भागीदारी रहती है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। खास तौर पर दिल्ली में 15 अगस्त के दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। इसे स्वतंत्रता, उत्साह और उल्लास की भावना से जोड़कर देखा जाता है।
15 अगस्त उन लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। यह दिन केवल इतिहास को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की एकता, अखंडता, लोकतंत्र और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का भी अवसर है।
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के सम्मान के साथ देश की उपलब्धियों को याद किया जाता है और भारत को और मजबूत, आत्मनिर्भर तथा विकसित बनाने का संकल्प लिया जाता है।
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