भारतीय शेयर बाजार और कॉरपोरेट सेक्टर से आ रहे ताज़ा आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय बाजार न सिर्फ रिकॉर्ड तेजी का आनंद ले रहे हैं, बल्कि देश की लिस्टेड प्राइवेट कंपनियों की बिक्री और प्रोडक्शन में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इस चमक के पीछे की इनपुट कॉस्ट का बढ़ता दबाव कॉरपोरेट वर्ल्ड के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार के दोनों बेंचमार्क इंडाइसेस, सेंसेक्स और निफ्टी, लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। बाजार के इस बुल रन के पीछे चार बड़े कारण काम कर रहे हैं
सस्ता क्रूड ऑयल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारत जैसे बड़े आयातक देश को बड़ी राहत दी है।
FII की घर वापसी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में दोबारा बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर दी है।
ग्लोबल मार्केट से सपोर्ट: वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को मजबूत किया है।
मजबूत रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपये में आई स्थिरता ने बाजार के जोखिम को कम किया है।
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया “RBI” के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत की लिस्टेड प्राइवेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की सेल्स में सालाना आधार पर 14.5% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस ग्रोथ को सबसे ज्यादा रफ्तार ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नॉन-फेरस मेटल इंडस्ट्री से मिली है। वहीं, अगर सभी नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों की बात करें, तो उनकी कुल बिक्री ग्रोथ 13.9% रही है, जो बाजार में मजबूत डिमांड को दर्शाती है।
आईटी सेक्टर की बिक्री में 9.9% की स्थिर ग्रोथ दर्ज की गई और नॉन-आईटी सर्विस सेक्टर ने 20% से अधिक की तूफानी बढ़त के साथ सबको चौंकाया है।
इस चौतरफा तेजी के बीच कंपनियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं। RBI के डेटा ने एक बड़ी चिंता की ओर इशारा किया है,मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की रॉ मटेरियल कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) में 18.3% का भारी उछाल आया है। अब कंपनियों की कुल बिक्री का 58% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ इनपुट कॉस्ट में जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियां सामान बेच तो ज्यादा रही हैं, लेकिन लागत बढ़ने के कारण उनका नेट प्रॉफिट मार्जिन दबाव में आ सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है की प्रेजेंट डेटा यह साफ करते हैं कि इंडियन इकोनॉमी इस समय एक ‘स्टेबल ग्रोथ फेज’ में है। बाजार में लिक्विडिटी और डिमांड दोनों मौजूद हैं। हालांकि, कॉरपोरेट सेक्टर के लिए आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपनी इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करते हैं। यदि आने वाले समय में कच्चे माल की कीमतों में थोड़ी नरमी आती है, तो कंपनियों के मुनाफे और शेयर बाजार की तेजी को डबल बूस्टर मिल सकता है
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