हरियाणा की हाई-प्रोफाइल नीमका जेल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं। अयोध्या को दहलाने की साजिश रचने के आरोपी अब्दुल रहमान की जेल के भीतर बेरहमी से हत्या कर दी गई है। हमलावर कोई और नहीं, बल्कि उसके साथ ही बंद एक कश्मीरी कैदी अरुण चौधरी है।
बैरक में खूनी खेल
जेल सूत्रों के मुताबिक, हमला किसी प्रोफेशनल गैंगवार की तरह अंजाम दिया गया। हमलावर अरुण चौधरी ने जेल के भीतर ही किसी लोहे की वस्तु को घिसकर बनाए गए ‘नुकीले हथियार’ से अब्दुल रहमान के सिर पर एक के बाद एक कई वार किए। हमला इतना सटीक और घातक था कि जेल प्रशासन के पहुंचने से पहले ही रहमान ने दम तोड़ दिया।
कौन था अब्दुल रहमान?
अब्दुल रहमान कोई साधारण अपराधी नहीं था। यूपी के अयोध्या (मिल्कीपुर) का रहने वाला रहमान मार्च 2025 से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। 2 मार्च 2025 को हरियाणा STF ने रहमान को गिरफ्तार कर उसके पास से 2 जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे। पुलिस जांच में दावा किया गया था कि रहमान अयोध्या में किसी बड़े धमाके या आतंकी हमले को अंजाम देने की फिराक में था।
क्या यह ‘टारगेट किलिंग’ है?
इस हत्याकांड ने जेल प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस अब इन तीन मुख्य बिंदुओं पर तफ्तीश कर रही है:
क्या अरुण चौधरी ने किसी के इशारे पर यह हत्या की? क्या जेल के अंदर कैदियों के बीच बढ़ रहे तनाव की खबर अधिकारियों को नहीं थी? और क्या जेल की दीवारों के पीछे हथियार बनाने का सामान कैदियों तक कैसे पहुँच रहा है?
इस हत्या को अंजाम देने वाले आरोपी अरुण चौधरी पर केस दर्ज कर उसे ‘आइसोलेशन’ में डाल दिया गया है। पुलिस अब ये भी पता लगा रही है कि क्या इस मर्डर के पीछे कोई धार्मिक एंगल या पुरानी रंजिश थी। अब्दुल रहमान के शव को भारी सुरक्षा के बीच पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।