उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस बैठक को BJP के संविधान के खिलाफ बताते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जाति या समाज विशेष के आधार पर ऐसी बैठकों को पार्टी कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और अगर भविष्य में ऐसा दोहराया गया तो संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
‘ब्राह्मण भोज’ बैठक से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला 24 दिसंबर का है, जब लखनऊ में BJP के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने एक ‘ब्राह्मण भोज’ के नाम से बैठक आयोजित की। बैठक में ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इसे जातिगत गोलबंदी के तौर पर देखा। मथुरा दौरे पर पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी का अपना संविधान है, जो किसी भी जनप्रतिनिधि को जाति के आधार पर बैठक करने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने विधायकों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि आगे से ऐसी कोई गतिविधि न हो जो पार्टी की लाइन के खिलाफ जाए।
यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है, जब उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर BJP पर निशाना साधा है। SP नेता शिवपाल यादव ने तंज कसते हुए कहा कि BJP ब्राह्मणों को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर देखती है। सोशल मीडिया पर #BJPHatesBrahmin हैशटैग ट्रेंड करने लगा, जहां यूजर्स ने पार्टी पर ब्राह्मण विरोधी रवैये का आरोप लगाया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब ठाकुर या अन्य जातियों की बैठकें होती हैं, तब पार्टी चुप क्यों रहती है।
ठाकुर बैठकों पर चुप्पी, विपक्ष ने बताया दोहरा रवैया
विपक्षी दलों का कहना है कि BJP की नीति दोहरी है। उदाहरण के तौर पर 2024 में लखनऊ में ठाकुर समाज के विधायकों और नेताओं की बैठकें हुईं, जिनमें जातिगत मुद्दों पर चर्चा की गई थी। उन बैठकों में भी कई BJP विधायक शामिल थे, लेकिन तब न तो कोई चेतावनी दी गई और न ही इसे अनुशासनहीनता माना गया। विपक्ष इसे पार्टी का चयनात्मक रवैया बताते हुए सवाल उठा रहा है कि ब्राह्मणों की बैठक पर सख्ती और ठाकुरों की बैठकों पर खामोशी क्यों?
BJP सूत्रों का कहना है कि यह सख्ती पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी है। पंकज चौधरी का मानना है कि इस तरह की बैठकें नकारात्मक राजनीति को बढ़ावा देती हैं और समाज में गलत संदेश जाती हैं। वहीं, ब्राह्मण समाज के कुछ नेताओं का मानना है कि यह घटना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदरूनी मतभेदों का संकेत भी हो सकती है।
फिलहाल पार्टी ने बैठक में शामिल विधायकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार दो प्रमुख विधायकों को विशेष रूप से चेतावनी दी गई है। मामले की जांच जारी है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह पूरा विवाद आने वाले दिनों में यूपी की जातीय राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।