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बिहार चुनाव विशेष: कौन किस पर भारी ? सोशल मीडिया के सहारे लड़ी गई चुनावी जंग!

पटना. बिहार में किसकी बनेगी सरकार? कौन होगा अगला मुख्यमंत्री? क्या नीतीश कुमार फिर से सत्ता में वापसी करेंगे या तेजस्वी यादव इस बार अपने मुख्यमंत्री बनने के सपने को साकार कर पाएंगे? वहीं, क्या बीजेपी महाराष्ट्र मॉडल अपनाकर नीतीश की जगह अपना सीएम लाएगी या नहीं, ये सारे सवालों का जवाब 14 नवंबर को मिल जाएगा.

पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद महागठबंधन खेमे में खुशी का माहौल है, जबकि एनडीए में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी अंदरखाने “प्लान बी” पर काम कर रही है. पार्टी को एहसास है कि यदि बहुमत से दूरी रह गई तो उसे वैकल्पिक रणनीति तैयार रखनी होगी.

वहीं, तेजस्वी यादव युवाओं को नौकरी देने के वादे के साथ जनता का दिल जीतने की कोशिश में जुटे हैं. इस बीच, बिहार चुनाव में एक बार फिर सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभानी शुरू कर दी है.

जमीन पर जनसभाएं, रैलियाँ और रोड शो तो जारी हैं, लेकिन इस बार चुनावी समर का असली मैदान डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है. नेताओं की छोटी-छोटी क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.

अब यह चुनाव हाइटेक युग की तस्वीर पेश कर रहा है. इंटरनेट की दुनिया में कौन आगे निकले, इसे लेकर राजनीतिक दलों में जबरदस्त होड़ है. फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर समर्थक अपने-अपने उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं.

लगभग हर प्रत्याशी ने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए अपनी डिजिटल मौजूदगी मजबूत कर ली है. इसके लिए अलग-अलग आईटी टीमें भी गठित की गई हैं जो पर्दे के पीछे बैठकर सोशल मीडिया रणनीतियाँ तैयार कर रही हैं.

जोरदार स्लोगन, आकर्षक वीडियो क्लिप्स और तीखे पोस्ट्स के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की जा रही है. कई उम्मीदवार लाइव सेशन में जाकर सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं.

मौजूदा दौर में न लाउडस्पीकर का शोर सुनाई देता है, न दीवारों पर पोस्टरों की भरमार दिखती है लेकिन डिजिटल दुनिया में लोकतंत्र का शोर गूंज रहा है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया पर चल रहा यह चुनावी प्रचार, असली मतदान में किस हद तक असर दिखा पाता है. बिहार विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया अब सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीति का सबसे प्रभावी हथियार बन चुका है. जमीनी राजनीति के साथ-साथ अब डिजिटल राजनीति भी उतनी ही अहम हो गई है. ट्विटर पर ट्रेंड से लेकर फेसबुक लाइव और यूट्यूब वीडियो तक हर प्लेटफॉर्म मतदाताओं को प्रभावित करने का जरिया बन गया है.

इस चुनाव ने साबित कर दिया है कि अब नेता सिर्फ मंचों से नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन से भी जनता तक पहुँच बना रहे हैं. आने वाले दिनों में यह रुझान और भी गहराएगा, क्योंकि भविष्य के चुनावों में सोशल मीडिया ही सबसे बड़ा युद्धक्षेत्र बनने जा रहा है.

SYED MOHAMMAD ABBAS

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