JDU-BJP नेताओं के लिए क्या बोल गए पूर्व केन्द्रीय मंत्री आर के सिंह?
बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले एक बार फिर सत्ताधारी एनडीए के भीतर राजनीतिक खींचतान बढ़ता दिखाई दे रहा है. एक तरफ सीट बंटवारे को लेकर चल रहा कशमकश तो दूसरी तरफ नेताओं के तीखे बयान गठबंधन की समस्याओं में इजाफा कर रहे हैं. ऐसा ही बयान दिया है आरा से पूर्व सांसद आरके सिंह ने. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने एनडीए के ही नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया.
विरोध में उतरे आर के सिंह
बीजेपी नेता आरके सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘जेडीयू नेता भगवान सिंह कुशवाहा ने 8-9 हत्याएं की हैं. यह वही व्यक्ति है जिसने पहले आरजेडी से हमारे खिलाफ चुनाव लड़ा था. फिलहाल वह जेडीयू में हैं और जेडीयू ने उन्हें एमएलसी बनाया है. हमें खबर मिली कि पार्टी उन्हें टिकट देने जा रही है, तो हमने संजय झा से कहा कि अगर उन्हें टिकट देंगे तो हम विरोध करेंगे.’
इसके आगे उन्होंने जेडीयू के प्रदेश महासचिव राधा चरण शाह का भी खुला विरोध करते हुए कहा कि ‘हमें पता चला कि राधा चरण शाह, जो कुख्यात ड्रग माफिया है, उन्हें भी टिकट देने की तैयारी हो रही है. हमने कहा कि अगर उन्हें टिकट देंगे तो हम इसका विरोध करेंगे.’
उन्होंने यह भी कहा कि वे इसकी सूचना बीजेपी और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्षों को दे चुके हैं.
प्रशांत किशोर के आरोपों पर आरके सिंह ने क्या कहा ?
पिछले दिनों जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बीजेपी के कई बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाये थे, जिसमें बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नाम शामिल थे. अब आरके सिंह ने इस मुद्दे पर कहा है कि ‘प्रशांत किशोर ने दिलीप जायसवाल पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अवैध तरीके से एक मेडिकल कॉलेज पर कब्ज़ा कर लिया. इसका जवाब उन्हें देना चाहिए, वरना यह समझ लेना चाहिए कि उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है. अगर उनके पास जवाब है तो मानहानि का मुकदमा करें. प्रशांत किशोर बार-बार कहते हैं कि सम्राट चौधरी सातवीं कक्षा में फेल हो गए थे. उन्हें अपना मैट्रिक और ग्रेजुएशन की डिग्री दिखानी चाहिए. यह सरकार और पार्टी की साख पर सवाल खड़ा करता है’.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी ने अमरेंद्र प्रताप सिंह और राघवेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दिया तो वे चुनाव में इसका भी विरोध करेंगे.
आरके सिंह ने इन बयानों से साफ है कि आने वाले चुनाव में टिकट वितरण एक सिरदर्द बन सकता है. वहीं ये NDA के आपसी मतभेद को भी दिखा रहा है. हालांकि चुनावों से पहले इस तरह की बयानबाजी पहले भी होती रही है.
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