बिहार चुनाव से पहले लालू यादव परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल आज सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव से जुड़े एक भ्रष्टाचार के मामले पेश हुए थे. लालू यादव व्हीलचेयर पर अदालत पहुंचे थे. यह पेशी “लैंड फॉर जॉब” मामले की सुनवाई के लिए थी, जिसकी अगुवाई सीबीआई की विशेष अदालत के जज विशाल गोगने ने की.
इससे पहले अदालत ने इस केस में आरोप तय करने का फैसला 25 अगस्त को सुरक्षित रख लिया था, और आज की सुनवाई में सभी आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई थी. जज विशाल गोगने ने इस मामले में आरोप तय करने से संबंधित अपना आदेश भी सुनाया, जो लालू परिवार के लिए नई राजनीतिक और कानूनी चुनौती बन गया है.
सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई अदालत ने की टिप्पणी
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि लालू प्रसाद यादव ने टेंडर प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप किया था और उसमें महत्वपूर्ण बदलाव करवाए थे. सीबीआई अदालत ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं.
सीबीआई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी साजिश के तहत हुई थी, जिसमें लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी की गई. अदालत के अनुसार, जमीन का स्वामित्व राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को देने की योजना पहले से बनाई गई थी और यह सब लालू यादव की जानकारी में हुआ.
जब अदालत ने लालू यादव से पूछा कि क्या वे अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि वे निर्दोष हैं. इसी तरह, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने भी अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे दोषी नहीं हैं.
क्या था आईआरसीटीसी घोटाला ?
आईआरसीटीसी घोटाला, जिसे बीएनआर होटल टेंडर केस के नाम से भी जाना जाता है, साल 2004 से 2009 के बीच का मामला है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. इस दौरान रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका निजी कंपनियों को देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. सीबीआई के अनुसार, इन टेंडरों के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं की गईं और नियमों का उल्लंघन हुआ. जांच एजेंसी का आरोप है कि इन होटलों के ठेके लालू यादव के परिवार से जुड़े लोगों या करीबी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दिए गए. बदले में कुछ जमीनें परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों के नाम पर ली गईं, जिसके चलते इस केस को “लैंड फॉर होटल डील” या “लैंड फॉर जॉब केस” कहा गया. सीबीआई ने 2017 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की और 2018 में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. फिलहाल यह मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन है, जहां सुनवाई जारी है.
सीबीआई ने इस मामले में लालू परिवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था.
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस फैसले का बिहार चुनाव में क्या असर पड़ने जा रहा है. क्योंकि एनडीए गठबंधन अब लालू प्रसाद के परिवार पर भ्रष्टाचार को लेकर और आक्रामक होगा. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इससे तेजस्वी यादव को सहानुभूति भी मिल सकती है. क्योंकि ये फैसला पहले भी आ सकता था लेकिन चुनाव के बीच में आने से कई तरह के संदेश जा रहे हैं.