जैसे जैसे बिहार विधानसभा चुनाव पास आ रहा है बिहार में राजनितिक हलचल तेज हो गयी है. बीजेपी और जेडीयू के बाच सीट शेयरिंग को लेके भले ही समझौता हो गया हो पर अब जेडीयू के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है
भागलपुर की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक तूफ़ान उठ खड़ा हुआ है। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद अजय मंडल और विधायक गोपाल मंडल, दोनों ने एक ही दिन पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है, जिससे टिकट बंटवारे के दौर में जेडीयू के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है.
सांसद अजय मंडल का इस्तीफे का ऐलान
भागलपुर से जेडीयू सांसद अजय मंडल ने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अपने पद से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना पत्र पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि बतौर स्थानीय सांसद उनकी राय तक नहीं पूछी गई और संगठन में उनकी बात का कोई महत्व नहीं रह गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में ऐसे लोगों को टिकट दिया जा रहा है जिनका संगठन से कभी कोई जुड़ाव नहीं रहा, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है.
अजय मंडल ने यहां तक लिखा कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर तक नहीं दिया जा रहा, ऐसे में सांसद पद पर बने रहना उनके लिए “अनुचित” है. उन्होंने नीतीश कुमार से आग्रह किया कि उन्हें पद से त्यागपत्र देने की अनुमति दी जाए.
विधायक गोपाल मंडल ने सीएम आवास पर जमाया धरना
इसी बीच गोपालपुर से जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ने टिकट कटने की आशंका के बीच पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया. सुबह साढ़े आठ बजे से बैठे गोपाल मंडल ने साफ कहा कि— “मैं यहां से टिकट लेकर ही जाऊंगा. अगर लाठी मारेंगे तब ही हटूंगा। मुझे सीएम नीतीश कुमार से मिलना है.”
समर्थकों के साथ पहुंचे गोपाल मंडल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनका टिकट कटवाने की साज़िश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि वह नीतीश कुमार से नाराज़ नहीं हैं, लेकिन “बड़े नेता” उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि जब तक टिकट की पुष्टि नहीं होती, धरना जारी रहेगा.
इस दौरान नबीनगर विधानसभा क्षेत्र से आए जेडीयू कार्यकर्ताओं ने भी सीएम आवास के बाहर जोरदार नारेबाजी की. ये कार्यकर्ता पूर्व विधायक वीरेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे थे. साथ ही उन्होंने बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने का विरोध किया.
बिहार में चुनाव पास है, ऐसे में उनका इस तरह सार्वजनिक रूप से बगावती तेवर दिखाना जेडीयू में बगावत की चिंगारी को हवा दे सकता है. टिकट बंटवारे के इस दौर में खुला विरोध आने से पार्टी की अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक मंच पर आ गई है.
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों नेताओं को मनाने की कोशिश करेंगे या जेडीयू इस बगावत को नजरअंदाज कर आगे बढ़ेगी.