दिल्ली के बहादुर शाह मार्ग पर गुरुवार तड़के 2.20 बजे एक भीषण मुठभेड़ में बिहार के चार नामी बदमाश मारे गये. पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली और बिहार पुलिस के संयुक्त अभियान का हिस्सा थी. मुठभेड़ में शॉट-आउट के दौरान रंजन पाठक और उसके साथी बिमलेश महतो, मनीष पाठक और अमन ठाकुर ढेर हुए.
कौन था खूनी अपराधों का मास्टरमाइंड रंजन पाठक ?
रंजन पाठक, केवल 25 वर्ष की उम्र में, बिहार और नेपाल में कई खतरनाक अपराधों का मास्टरमाइंड बन चुका था. हत्या, लूट, फिरौती और अन्य संगठित अपराधों में उसकी कुख्याति इतनी थी कि उसकी नाम से ही लोग दहशत में रहते थे. अमन ठाकुर दिल्ली के करावल नगर का निवासी था, जबकि बाकी तीन सभी बिहार के सीतामढ़ी जिले के थे.
पुलिस ने बताया बिहार चुनाव से पहले आपराधिक साजिश रच रहे थे बदमाश
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में छिपा हुआ था और बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले बड़े अपराध की योजना बना रहा था. डीजीपी बिहार ने मीडिया को बताया कि गिरोह ‘सुपारी लेकर हत्या करता और वारदातों के बाद नेपाल या दिल्ली भाग जाता था. फिर लौटकर हर महीने नई वारदात को अंजाम देता.’ गिरोह का नाम ‘सिग्मा एंड कंपनी’ था.
डीजीपी ने आगे बताया कि अमन ठाकुर गिरोह के सदस्यों को छिपाने में मदद कर रहा था. गिरोह का लक्ष्य सीतामढ़ी जिले में अव्यवस्था और डर फैलाना था. पुलिस ने साफ किया कि आशंका थी कि ये अपराधी बिहार चुनाव के दौरान भी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे.