नई दिल्ली/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कथित तौर पर मोबाइल नेटवर्क की पुरानी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैनिकों और ठेकेदारों की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की। यह गतिविधियां उस समय सामने आईं जब क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित साइबर ऑपरेशन में SS7 (सिग्नलिंग सिस्टम 7) प्रोटोकॉल की कमजोरी का इस्तेमाल किया गया।
साइबर विशेषज्ञों ने इसे एक कोऑर्डिनेटेड सर्विलांस ऑपरेशन बताया है, जिससे टारगेटेड ट्रैकिंग संभव हुई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सिर्फ SS7 ही नहीं, बल्कि मोबाइल एडवर्टाइजिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस तरह की डेटा ट्रैकिंग का हमलों में कोई निर्णायक रोल नहीं था। फिर भी, इस खुलासे ने सैन्य सुरक्षा और डिजिटल प्राइवेसी को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका में साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
यह मामला दिखाता है कि पुरानी मोबाइल नेटवर्क तकनीकें (जैसे SS7) आज भी बड़े सुरक्षा जोखिम बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 5G के दौर में भी अगर इन कमजोरियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे साइबर हमले और बढ़ सकते हैं।
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