एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में दौरा कर रहे है और द्विपक्षीय संबंधों को बूस्ट देने पर फोकस कर रहे हैं। वहीं यूक्रेन से युद्ध में उनकी सेना एक बड़ी जीत दर्ज करने के करीब है। पूर्वी यूक्रेन का पोक्रोव्स्क (Pokrovsk) शहर अब एक हॉटस्पॉट बन चुका है, और इस पर रूसी सेना की बढ़ती पकड़ मॉस्को के लिए एक बड़ी सफलता साबित हो सकती है।
यूक्रेन का नया संकट पोक्रोव्स्क!
पोक्रोव्स्क, डोनेत्स्क ओब्लास्ट में एक मेजर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब है। इस पर कब्ज़ा करना यूक्रेन की रक्षा लाइन की कमर तोड़ सकता है। पोक्रोव्स्क हाथ आने के बाद रूस को यूक्रेन के नियंत्रण वाले बड़े शहरों क्रामाटोरस्क और स्लोवियांस्क की ओर बढ़ने के लिए एक सीधा और मेन रूट मिल जाएगा. जिसे रणनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स साफ बता रहे हैं कि रूसी सेना तेज़ गति से आगे बढ़ रही है और यूक्रेनी सेना को पीछे हटना पड़ रहा है। ये स्थिति कुछ दिन और चली तो यूक्रेन को अपने एक और स्ट्रैटिजिक प्वाइंट से हाथ धोना पड़ सकता है।
कूटनीति और युद्ध का अनोखा ‘ट्विस्ट’
राष्ट्रपति पुतिन का ये हाई-प्रोफाइल भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति वार्ता भी तेज हो रही है और यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई भी गति बढ़ा रही है। एक ओर राजनयिक मंच पर वो भारत के साथ डिफेंस डील्स को अंतिम रूप दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य मोर्चे पर अपनी स्ट्रेंथ का प्रदर्शन कर रहे हैं।
डिफेन्स एक्सपर्ट की माने तो रूस की ‘टू-प्रॉन्ग स्ट्रेटेजी’ हैं। यानी एक तरफ ग्लोबल पार्टनरशिप भारत के साथ मज़बूत करना, और दूसरी तरफ युद्ध के मैदान में निर्णायक बढ़त हासिल करना। पोक्रोव्स्क में ये संभावित जीत पुतिन को किसी भी इंटरनेशनल टॉक या शांति वार्ता में सुपरियर पोजीशन में खड़ा कर देगी।