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US-Iran Deal से पाकिस्तान को बड़ा झटका! तैयारियां पूरी थीं, लेकिन शहबाज का स्विट्जरलैंड दौरा अचानक टला

इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक तैयारियों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते के औपचारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रस्तावित स्विट्जरलैंड दौरा स्थगित कर दिया है। बताया गया कि समझौते पर औपचारिक मंच से पहले ही डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर हो चुके हैं और इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया।

पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में प्रस्तावित कार्यक्रम अब जरूरी नहीं रह गया क्योंकि दोनों पक्ष पहले ही इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया के जरिए समझौते को अंतिम रूप दे चुके हैं।

समारोह से पहले ही लागू हो गया समझौता

घटनाक्रम के मुताबिक समझौता ज्ञापन पर दूरस्थ माध्यम से हस्ताक्षर किए गए, जिसके बाद औपचारिक आयोजन की आवश्यकता समाप्त हो गई। इससे पहले पाकिस्तान की ओर से संकेत दिए गए थे कि समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

बताया गया कि समझौते के शुरुआती चरण के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की दिशा में कदम उठाएगा, जबकि अमेरिका ईरान पर लागू नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां तनाव या सामान्य स्थिति का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।

क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग की स्थिति वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। अब समझौते के बाद ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

समारोह रद्द होने के संकेत पहले ही मिलने लगे थे

समारोह को लेकर अटकलें उस समय तेज हुईं जब पाकिस्तान की ओर से सार्वजनिक जानकारी में बदलाव देखा गया। इसके बाद विदेश नीति से जुड़े संकेतों ने यह स्पष्ट किया कि औपचारिक कार्यक्रम अब प्राथमिकता नहीं रहा।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि डिजिटल प्रक्रिया के जरिए समझौता लागू होने के बाद सार्वजनिक हस्ताक्षर समारोह की आवश्यकता कम हो गई है।

मध्यस्थता की भूमिका में दिखा पाकिस्तान

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ की भूमिका में पेश किया। दावा किया गया कि क्षेत्रीय संवाद को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान और कतर की भूमिका रही, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ सकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता प्रभावी रूप से लागू होता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिखाई दे सकता है।

 

vineet verma

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