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राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा एक्शन! आरोपियों के 20 करीबियों पर जिला छोड़ने की रोक, ट्रस्ट ने तेज की नए CEO की नियुक्ति की तैयारी

अयोध्या: श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। जांच के दौरान सामने आ रहे तथ्यों के बीच गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों के संपर्क में रहे करीब 20 लोगों के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। वहीं, 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने कई संबंधित लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए और आरोपियों से उनके संबंधों की जानकारी जुटाई। इसी बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

जांच में जुटी पुलिस, करीबियों से पूछताछ जारी

पुलिस आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों से मिली जानकारियों का मिलान पूछताछ में सामने आए तथ्यों, कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों से कर रही है। सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग टीमें सूची में शामिल लोगों को फोन और अन्य माध्यमों से बुलाकर पूछताछ कर रही हैं। उनसे आरोपियों के साथ संबंध, आर्थिक लेन-देन, मुलाकातों और बाद की गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी ली जा रही है। अधिकांश लोगों को जांच पूरी होने तक पुलिस के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

चोरी गई कुल रकम पर अब भी तस्वीर साफ नहीं

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गणना से पहले कुल कितनी राशि की चोरी हुई। अधिकारियों का कहना है कि बैंक तक पहुंची रकम का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, लेकिन गणना से पहले या गणना के दौरान निकाली गई राशि का सटीक आकलन संभव नहीं है। फिलहाल बरामद नकदी, संपत्ति के दस्तावेज, आभूषण और अन्य जब्त सामान के आधार पर ही चोरी की रकम का अनुमान लगाया जा रहा है।

एसआईटी जांच में क्या सामने आया

एसआईटी और पुलिस की अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि चढ़ावे की चोरी गणना प्रक्रिया या नकदी हैंडलिंग के दौरान हुई। सीसीटीवी फुटेज में गणना से जुड़े कर्मचारी नोट और नकदी की गड्डियां छिपाते हुए दिखाई दिए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी की कुल रकम कितनी थी और यह सिलसिला कब से चल रहा था। अधिकारियों का कहना है कि बरामद नकदी और आरोपियों के पास से मिली संपत्तियों के आधार पर ही फिलहाल चोरी की राशि का अनुमान लगाया जा सकता है। मामले की जांच अभी जारी है।

13 जुलाई को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर विचार करेगी।

टिन्नू और सुभाष की कस्टडी रिमांड की तैयारी

पुलिस जल्द ही आरोपी टिन्नू और सुभाष को कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इससे पहले चार अन्य आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस पहले दोनों आरोपियों से जेल में पूछताछ करेगी और उसके बाद अदालत से कस्टडी रिमांड की मांग करेगी। वहीं, रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश से मिली जानकारियों और साक्ष्यों का सत्यापन भी जारी है।

ट्रस्ट करेगा अपने खर्च पर सीईओ की नियुक्ति

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तय किया है कि नए सीईओ की नियुक्ति ट्रस्ट अपने संसाधनों से करेगा और उनका वेतन भी ट्रस्ट ही देगा। छह जुलाई की बैठक में सीईओ चयन के लिए सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपेगी, जिस पर आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी।

22 जुलाई की बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला

ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में सीईओ पद के लिए चयनित तीन नामों के पैनल पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम की घोषणा की जा सकती है। साथ ही ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलावों पर भी विचार किया जाएगा ताकि संचालन व्यवस्था अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाई जा सके।

एसआईटी रिपोर्ट के बाद बदलाव की तैयारी तेज

चढ़ावा चोरी प्रकरण में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई स्तरों पर बरती गई लापरवाहियों और गैरजिम्मेदाराना रवैये का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं और विपक्ष ट्रस्ट को भंग करने की मांग कर रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए ट्रस्ट प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सीईओ की नियुक्ति के बाद ट्रस्टियों की प्रशासनिक भूमिका सीमित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि किसी स्तर पर शक्तियों के दुरुपयोग की संभावना कम हो और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।

vineet verma

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