अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच अब और व्यापक हो गई है। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के साथ-साथ उनके परिजनों के करीब 50 बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर हेरफेर किए गए धन का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, जांच अधिकारी धन के लेनदेन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रहे हैं ताकि कथित रूप से चोरी किए गए रुपयों का वास्तविक प्रवाह सामने आ सके।
जांचकर्ताओं की नजर इस बात पर है कि कहीं आरोपियों ने मंदिर के दान की राशि अपने व्यक्तिगत खातों या प्रॉक्सी खातों में तो स्थानांतरित नहीं की। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या रकम परिवार के सदस्यों के खातों में भेजी गई या फिर उससे संपत्ति, वाहन, आभूषण अथवा अन्य माध्यमों में निवेश किया गया।
पुलिस बैंक खातों के लेनदेन, हाल के निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रूप से गबन की गई राशि का उपयोग कहीं जमीन खरीदने, मकान निर्माण या अन्य संपत्तियां अर्जित करने में तो नहीं किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी आरोपियों और उनके रिश्तेदारों द्वारा हाल के समय में खरीदी गई संपत्तियों की भी पड़ताल कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ आरोपियों ने हाल में जमीन खरीदी थी और मकान निर्माण का कार्य भी कराया जा रहा था। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुलिस आगे की पूछताछ के लिए दो अन्य आरोपियों की हिरासत भी मांग सकती है।
इससे पहले पुलिस अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को रिमांड पर लेकर उनसे कथित गबन और मामले में अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका को लेकर पूछताछ कर चुकी है।
इसी बीच राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। सूत्रों के अनुसार, उनका यह दौरा राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा के उद्देश्य से था। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई बैठक के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा माना जा रहा है।
राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेरफेर के आरोप सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। इस समिति को राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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