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‘बंगाल की खोई गरिमा लौटाओ’… राज्यपाल की अपील पर ममता का तीखा पलटवार, बोलीं-‘बंगाल लाटसाहेब की भाषा नहीं सहेगा’

कोलकाता, 16 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा और चढ़ गया है। नवनियुक्त राज्यपाल आर.एन. रवि ने पोइला बैसाख के मौके पर युवाओं से राज्य की “खोई हुई गरिमा” वापस लाने और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनने की अपील की, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुरंत तीखा जवाब देकर इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। यह बयानबाजी ऐसे समय आई है जब बंगाल में चुनावी माहौल पहले से ही गरम है।

लोक भवन में आयोजित पोइला बैसाख कार्यक्रम में राज्यपाल रवि ने कहा कि बंगाल कभी देश की आर्थिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक ताकत का बड़ा केंद्र था, लेकिन अब उसे फिर से उसी ऊंचाई पर ले जाने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर युवाओं से कहा कि “positive change आसमान से नहीं आएगा, इसके लिए हर नागरिक को आगे आना होगा।” रवि ने बंगाल की पुरानी औद्योगिक और शैक्षणिक ताकत का जिक्र करते हुए वर्तमान स्थिति पर चिंता भी जताई।

ममता बनर्जी का पलटवार: ‘लाटसाहेब की भाषा बंगाल नहीं सहेगा’

राज्यपाल के इस बयान के कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बिना नाम लिए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “बंगाल के लाटसाहेब, जो सबसे बड़े घर में रहते हैं, नए साल पर लोगों को शुभकामना देने के बजाय सरकार पर हमला कर रहे हैं।” ममता ने इशारों-इशारों में केंद्र सरकार और राज्यपाल पर बाहरी दखल का आरोप लगाया और साफ कहा कि बंगाल की जनता किसी भी ‘बाहरी दबाव’ को स्वीकार नहीं करेगी।

TMC का कहना है कि राज्यपाल का बयान सिर्फ प्रेरणात्मक नहीं बल्कि चुनाव से पहले राजनीतिक हस्तक्षेप जैसा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि युवाओं को टारगेट करके विपक्षी नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर BJP और राज्यपाल समर्थक इसे राज्य के विकास और सुशासन पर जरूरी चर्चा बता रहे हैं।

2026 चुनाव से पहले और गरम होगी बंगाल की राजनीति

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बंगाल में भाजपा लगातार TMC सरकार पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे पर हमलावर है। वहीं TMC केंद्र पर राज्य की राजनीति में हस्तक्षेप का आरोप लगाकर इसे “बंगाल बनाम बाहरी ताकत” की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि राज्यपाल का युवाओं पर फोकस चुनाव से पहले narrative building strategy का हिस्सा हो सकता है।

कुल मिलाकर, पोइला बैसाख के सांस्कृतिक मंच से शुरू हुई यह बयानबाजी अब बंगाल चुनाव 2026 की बड़ी सियासी जंग का हिस्सा बन चुकी है। आने वाले दिनों में BJP, TMC और राजभवन के बीच इस मुद्दे पर और तीखे बयान देखने को मिल सकते हैं।

news desk

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