18 सितंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। मकसद था रूस पर दबाव बनाना, लेकिन अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने ट्रंप की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं अब अमेरिका ने रूस से 30 लाख टन डीजल खरीदने की बड़ी डील का ऐलान किया है। लेकिन अब सवाल यह है कि आखिर रूस पर सख्ती दिखाने वाले ट्रंप उसी से तेल क्यों खरीद रहे हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर इस ऐतिहासिक सौदे की जानकारी दी। ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका आने वाले दिनों में रूस से कुल 30 लाख टन डीजल खरीदेगा।
तय योजना के मुताबिक:
इस डील के साथ ही अमेरिका ने रूस पर तेल बिक्री को लेकर लगाई गई तमाम पाबंदियों को भी हटा दिया है।
पुतिन को टैरिफ की धमकी देने के ठीक बाद हुई इस डील को लेकर ट्रम्प को अपने ही देश में तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। मिड-टर्म इलेक्शन से ठीक पहले हुए इस कदम से विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी बेहद आक्रामक हो गई है।
अमेरिकी सीनेटर और डेमोक्रेटिक नेता रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस डील को शर्मनाक बताते हुए ट्रंप पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ऐसा समझौता अमेरिका के चरित्र पर धब्बा है और कांग्रेस के प्रतिबंध कानून की मंशा के विपरीत है। ब्लूमेंथल ने ट्रंप से इस समझौते को तुरंत रद्द करने की मांग की। इस विवाद ने रूस के प्रति ट्रंप की नीति और यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी रुख पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका और रूस के बीच हुई इस डीजल सप्लाई डील से यूक्रेन बेहद नाराज है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की।
जेलेंस्की ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस तरह के ‘तोहफे’ देने से दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो सकती। उन्होंने ट्रम्प के इस कदम को कमजोर और अनुचित करार देते हुए कहा कि रूस से तेल खरीदना सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध को फंडिंग देने (युद्ध में निवेश करने) जैसा है।
अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति की यह डील अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए विवाद को जन्म दे रही है। एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इसे युद्ध को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी विपक्ष भी ट्रंप के फैसले पर सवाल उठा रहा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील का बचाव करते हुए कहा है कि यह अमेरिकी ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजार के लिए एक बड़ा कदम है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस समझौते का रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की विदेश नीति पर क्या असर पड़ता है।
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