नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से वैश्विक बाजार के लिए डीजल की आपूर्ति शुरू करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद यूक्रेन ने नाराजगी जताई है, जबकि अमेरिका की रूस पर दबाव बनाने वाली प्रतिबंध नीति को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रंप का कहना है कि रूसी डीजल की आपूर्ति से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वहीं, आलोचकों का आरोप है कि इस कदम से रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक मजबूती मिल सकती है।
पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने की डीजल सप्लाई की घोषणा
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से डीजल आपूर्ति शुरू करने की जानकारी दी। ट्रंप के अनुसार, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि रिफाइनरियों की स्थिति को देखते हुए भविष्य में 30 लाख टन तक अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की संभावना भी है। ट्रंप का दावा है कि इस कदम से वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट
ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय को रूसी डीजल की वैश्विक बाजार में आपूर्ति से जुड़े लेनदेन की अनुमति देने के लिए अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले संबंधित लेनदेन को 7 अप्रैल तक करीब छह महीने के लिए मंजूरी दी गई है।
रूस पर दबाव की नीति को लेकर अमेरिका में ही उठे सवाल
ट्रंप के इस फैसले की आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि अमेरिका ने हाल के समय में रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए थे। करीब तीन सप्ताह पहले ही ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे।
इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है।
कैटो इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष स्कॉट लिंसिकोम ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका रूस के ऊर्जा खरीदारों पर टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, तो क्या खुद अमेरिका द्वारा रूसी ऊर्जा खरीद पर भी ऐसे कदम लागू किए जा सकते हैं।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि रूस के तेल पर प्रतिबंधों में ढील देना कांग्रेस के द्विदलीय प्रतिबंध कानून की भावना के खिलाफ है।
रिपब्लिकन सांसद माइकल मैककॉल ने भी चिंता जताते हुए कहा कि ईंधन की कीमतें कम करना जरूरी है, लेकिन रूसी तेल पर प्रतिबंधों में राहत देने से क्रेमलिन की युद्ध क्षमता को आर्थिक समर्थन मिल सकता है।
जेलेंस्की ने कहा- रूस को फायदा पहुंचाने वाला फैसला
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रूस के साथ तनाव कम करने के लिए किसी स्पष्ट और स्थायी समझौते के बिना प्रतिबंधों में ढील देना रूस के हित में है।
जेलेंस्की ने कहा कि रूस को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की अनुमति देना ऐसे युद्ध में निवेश करने जैसा है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका से यूक्रेन के समर्थन को जारी रखने और रूस के साथ बातचीत में मजबूती बनाए रखने की अपील की।
वहीं, रूसी राष्ट्रपति के आर्थिक दूत किरिल दिमित्रीव से जुड़े एक एक्स अकाउंट पर कहा गया कि रूस और अमेरिका के बीच डीजल तथा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग से दुनिया को लाभ हो सकता है।
रूस से तेल खरीद पर पहले ट्रंप ने की थी आलोचना
ट्रंप का मौजूदा फैसला उनके पुराने बयानों से अलग माना जा रहा है। सितंबर 2025 में उन्होंने नाटो सहयोगी देशों की रूस से तेल खरीदने को लेकर आलोचना की थी।
उन्होंने कहा था कि रूस से ऊर्जा खरीदने से उसके खिलाफ बातचीत में देशों की स्थिति कमजोर होती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे रूस को अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद मिलती है।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए प्रतिबंधित रूसी तेल की उन खेपों की खरीद पर सीमित अवधि की छूट दी थी, जो पहले से समुद्र में परिवहन के दौरान थीं। हालांकि, मौजूदा फैसला उससे कहीं व्यापक माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रूसी डीजल की आपूर्ति से अमेरिकी बाजार में ईंधन की कीमतें वास्तव में कम होंगी और इसका रूस की अर्थव्यवस्था तथा यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों पर क्या असर पड़ेगा।
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