Latest News

तुलसी की चाय बेहतर या नीम का काढ़ा? रोजाना पीने से पहले जान लें बड़ा फर्क, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया किसे क्या लेना चाहिए

नई दिल्ली: तुलसी और नीम भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले दो ऐसे पौधे हैं, जिन्हें लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा में जगह मिली हुई है। इनके पत्तों से चाय या काढ़ा बनाकर पीने का चलन भी पुराना है। लेकिन तुलसी और नीम को एक जैसा समझना सही नहीं है। दोनों में मौजूद जैव सक्रिय यौगिक और शरीर पर उनके संभावित प्रभाव अलग हो सकते हैं। आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के मुताबिक, तुलसी और नीम दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन इनके सेवन का तरीका और मात्रा महत्वपूर्ण है।

तुलसी और नीम में क्या है बड़ा अंतर?

तुलसी को अंग्रेजी में होली बेसिल कहा जाता है। इसके पत्तों में कई तरह के पौधों से मिलने वाले जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। वहीं नीम की पत्तियों में भी ऐसे यौगिक मौजूद होते हैं, जिनके एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी प्रभावों पर शोध हुआ है।

हालांकि, दोनों का पारंपरिक इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। इसलिए सिर्फ यह सोचकर कि दोनों प्राकृतिक हैं, उन्हें मनमाने तरीके से या ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं है।

तुलसी के पत्ते खाने से क्या फायदे हो सकते हैं?

तुलसी को एक ऐसी जड़ी-बूटी माना जाता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से तनाव और दूसरी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। कुछ शोधों में तुलसी के सेवन को तनाव और मानसिक थकान में सुधार से जोड़ा गया है।

तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे जैव सक्रिय यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, तुलसी का इस्तेमाल गैस, अपच और पेट से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी किया जाता है। इसमें सूजनरोधी गुण भी पाए जाते हैं, जो दर्द और सूजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

कुछ अध्ययनों में तुलसी के सेवन को ब्लड शुगर के स्तर पर संभावित प्रभाव से भी जोड़ा गया है। डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, रोजाना सीमित मात्रा में तुलसी को डाइट में शामिल किया जा सकता है। उनके मुताबिक 5-6 तुलसी के पत्तों का सेवन किया जा सकता है।

तुलसी की चाय बनाने का आसान तरीका

तुलसी की चाय तैयार करने के लिए कुछ साफ और ताजे पत्तों को अच्छी तरह धो लें। एक कप पानी में इन्हें डालकर कुछ मिनट तक उबालें। इसके बाद पानी छानकर हल्का गर्म रहने पर पिया जा सकता है।

अगर स्वाद पसंद नहीं आता तो इसमें थोड़ी अदरक या नींबू भी मिलाया जा सकता है।

नीम के पत्तों के क्या फायदे हैं?

नीम का इस्तेमाल भी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से होता आया है। इसकी पत्तियों में मौजूद जैव सक्रिय यौगिकों को लेकर एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी और रोगाणुरोधी प्रभावों पर शोध किया गया है।

पारंपरिक रूप से नीम का इस्तेमाल त्वचा, मुंह और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। मुंहासे, खुजली और त्वचा से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी नीम का इस्तेमाल देखने को मिलता है।

कुछ शुरुआती अध्ययनों में नीम के यौगिकों को ब्लड ग्लूकोज कम होने से भी जोड़ा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नीम किसी बीमारी की दवा का विकल्प है।

नीम का काढ़ा पीने में बरतें सावधानी

नीम के सेवन को लेकर सावधानी ज्यादा जरूरी है। इसकी पत्तियों का बहुत अधिक मात्रा में या लंबे समय तक सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता। खास तौर पर नीम का तेल मुंह के जरिए लेने पर विषाक्त हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं, बच्चों और डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना नीम का सेवन नहीं करना चाहिए। किसी बीमारी के इलाज के लिए इसे नियमित दवा के स्थान पर इस्तेमाल करना भी उचित नहीं है।

नीम की चाय या काढ़ा कैसे बनाएं?

नीम की चाय या काढ़ा बनाने के लिए साफ किए हुए कुछ पत्तों को पानी में डालकर कुछ मिनट तक उबाला जाता है। इसके बाद पानी को छानकर लिया जा सकता है। नीम का स्वाद काफी कड़वा होता है, इसलिए इसे पीने से पहले अपनी सहनशीलता और स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।

तुलसी की चाय पिएं या नीम का काढ़ा?

अगर दोनों में से किसी एक को चुनने की बात है तो इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। तुलसी की चाय स्वाद में अपेक्षाकृत हल्की और रोजमर्रा में आसानी से ली जाने वाली हर्बल ड्रिंक हो सकती है, जबकि नीम अधिक कड़वा होता है और इसके सेवन में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है।

दोनों पौधों के पारंपरिक उपयोग और संभावित फायदे अलग हैं। इसलिए सिर्फ ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद में किसी भी हर्ब का अधिक सेवन करने के बजाय सीमित मात्रा और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसका इस्तेमाल करना बेहतर है। खासकर अगर आप किसी बीमारी की दवा लेते हैं, गर्भवती हैं या बच्चों के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

vineet verma

Recent Posts

दिल्ली में जहरीली हवा का शिकंजा: ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचा AQI, GRAP-1 की पाबंदियां लागू

राजधानी दिल्ली में ठंड की आहट के साथ ही प्रदूषण का खतरा एक बार फिर…

27 minutes ago

अंडर-19 महिला टी20 वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी: बांग्लादेश और नेपाल करेंगे मेजबानी, 22 जनवरी को वेस्टइंडीज से भिड़ेगा भारत

युवा महिला क्रिकेटरों के सबसे बड़े महाकुंभ का बिगुल बज चुका है। आईसीसी (ICC) ने…

1 hour ago

Vaibhav Sooryavanshi: न्यूजीलैंड के खिलाफ भी बेंच पर बैठेंगे वैभव सूर्यवंशी? श्रेयस अय्यर के बयान से बढ़ी निराशा

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चर्चा बटोरने वाले 15 वर्षीय वैभव…

2 hours ago

आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में धांधली का आरोप: सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 अक्टूबर तक उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट पर लगाई रोक

आंध्र प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव में चुनावी मैदान जंग का मैदान बन चुका है।…

2 hours ago

सौरभ दास-आशुतोष रांका पर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पूछा- आप जेन-जी नहीं हैं

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास और…

2 hours ago

Reliance Jio Platforms IPO: खुलते ही मची लूट, 1 घंटे में 83% सब्सक्राइब; QIB ने बनाया रिकॉर्ड

शेयर बाजार की घंटी बजते ही 21 अक्टूबर की सुबह एक ऐसा तूफान आया जिसने…

3 hours ago