बांग्लादेश में बिगड़ते हालात के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया। मतदान के समाप्त होते ही शुरुआती रुझानों से स्पष्ट तस्वीर उभरने लगी है कि देश में नई सरकार के गठन की दिशा क्या होगी। शुरुआती परिणामों में यह संकेत मिल रहे हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है और अगली सरकार बनाने की संभावना मजबूत हो गई है।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख नेता हैं। उनका जन्म 20 नवंबर 1967 को हुआ था। उनके पिता जियाउर रहमान बांग्लादेश के छठे राष्ट्रपति और बीएनपी के संस्थापक थे, जिनकी 30 मई 1981 को हत्या कर दी गई थी।
उस समय तारिक रहमान की उम्र महज 15 वर्ष थी। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मां खालिदा जिया के संरक्षण में हुआ, जो आगे चलकर बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। देश की राजनीति में लंबे समय तक खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच सत्ता को लेकर तीखा राजनीतिक संघर्ष चलता रहा और दोनों ने एक-दूसरे को लगातार चुनौती दी।
बीएनपी के मुताबिक, 23 वर्ष की आयु में सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले तारिक रहमान ने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) से औपचारिक रूप से जुड़कर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई।
साल 2007 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। उस दौरान उन्होंने जेल में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनकी रिहाई कुछ शर्तों के साथ हुई, जिनमें सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखना भी शामिल था। 2008 में रिहाई के बाद वे इलाज के लिए लंदन चले गए और लंबे समय तक वहीं से राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करते रहे।
लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद तारिक रहमान की देश वापसी को बीएनपी समर्थक “उम्मीद की नई किरण” के रूप में देख रहे हैं। उनकी अगुवाई में पार्टी ने राजधानी ढाका में शक्ति प्रदर्शन करते हुए पूर्ण समर्थन का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि इस समय बांग्लादेश के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। देश में लगातार हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बनी नई सरकार भी स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करने में सफल नहीं हो सकी है।
करीब 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी थी । राजधानी ढाका समेत कई शहरों में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। जगह-जगह रैलियां, जुलूस और शक्ति प्रदर्शन हुए, जिन्हें पार्टी ने “नई राजनीतिक शुरुआत” का संकेत बताया।
तारिक रहमान की सक्रिय वापसी ऐसे समय में हुई थी जब देश हालिया आम चुनावों के बाद नई सत्ता व्यवस्था के दौर से गुजर रहा थी । राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि उनकी मौजूदगी BNP संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत कर सकती है, खासकर युवा और शहरी मतदाताओं के बीच।
हालांकि, उनकी वापसी ने सियासी बहस भी तेज कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि इससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, जबकि BNP का दावा है कि रहमान के नेतृत्व में पार्टी स्थिर और जवाबदेह शासन देने में सक्षम होगी।