अयोध्या/लखनऊ । अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे के कथित गबन की जांच अब एक बेहद चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की ताबड़तोड़ छापेमारी में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के घर से “रामराज्य कोष” लिखा हुआ लकड़ी का एक भारी-भरकम दान बॉक्स बरामद हुआ है।
इस पारंपरिक बॉक्स पर डिजिटल पेमेंट के लिए एक QR कोड भी चिपका मिला है। जांच एजेंसियां अब इस बरामदगी को पूरे महाघोटाले की सबसे अहम कड़ी मान रही हैं, जिसने इस पूरे मामले को एक सोची-समझी ‘फाइनेंशियल और साइबर साजिश’ में बदल दिया है।
अब तक इस घोटाले में केवल कैश (नकद) की हेराफेरी की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन QR कोड की एंट्री ने जांचकर्ताओं के भी होश उड़ा दिए हैं। फोरेंसिक और साइबर विशेषज्ञों की टीम अब इस डिजिटल जाल को काटने में जुट गई है। SIT मुख्य रूप से तीन बड़े सवालों के जवाब तलाश रही है..
इस हाई-प्रोफाइल स्कैम की तह तक जाने के लिए स्थानीय अदालत ने SIT को 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया है। यह समय इसलिए भी क्रूशियल है क्योंकि पुलिस कार्रवाई से ठीक पहले का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आया है, जिसमें मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला एक ‘रहस्यमयी बैग’ लेकर भागता हुआ दिखाई दे रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ‘रामराज्य कोष’ और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का डेटा खंगालने के बाद इस सिंडिकेट के पीछे छिपे कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय है।
शुरुआती तफ्तीश में मंदिर के चढ़ावे को संभालने और उसके कैश मैनेजमेंट की प्रक्रिया में बेहद गंभीर कमियां (Procedural Lapses) उजागर हुई हैं।
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में कूटनीतिक भूचाल आ गया है। विपक्षी दल जहां मंदिर के चढ़ावे से जुड़े सुरक्षा तंत्र की पारदर्शिता पर तीखे सवाल दाग रहे हैं, वहीं सरकार और मंदिर ट्रस्ट ने साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।
मामले में अब तक 8 आरोपी सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं। SIT ने साफ संकेत दिए हैं कि जैसे ही ‘रामराज्य कोष’ के डिजिटल लेन-देन और बैंक खातों की कड़ियां आपस में जुड़ेंगी, कई और सफेदपोशों की गिरफ्तारियां निश्चित हैं।
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