दीपावली की जगमगाती तैयारियों के बीच वह पावन घड़ी आ गई है, जिसका हर घर को बेसब्री से इंतजार रहता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि अपने साथ खुशियों का ऐसा खजाना लेकर आती है, जो सालभर की तंगी को दूर करने की ताकत रखता है। सोना-चांदी खरीदने की होड़, घरों के बाहर जगमगाते दीये और आरोग्य के देवता की विशेष कृपा आखिर क्या है इस महा-पर्व का असली रहस्य? इस बार धनतेरस पर कौन सा शुभ मुहूर्त आपके घर में सुख-समृद्धि के द्वार खोलने वाला है? आइए जानते हैं इस पावन पर्व की हर एक बारीक और जरूरी बात।
वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व आज यानि शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इसके मुख्य समय इस प्रकार हैं:
त्रयोदशी प्रारंभ: 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी समाप्त: 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक
धनतेरस का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन की उस पौराणिक कथा से है, जब भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनकी आराधना आरोग्य, दीर्घायु और रोगों से मुक्ति की कामना के साथ की जाती है।
इसके साथ ही, इस दिन माता लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष विधान है, ताकि घर में धन के साथ-साथ धर्म, स्वास्थ्य और सद्बुद्धि का भी वास हो।
भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का दिव्य रूप माना जाता है। उनके हाथों में सुशोभित अमृत कलश जीवन की निरंतरता और स्वास्थ्य का प्रतीक है। पूजन के समय इस प्रसिद्ध मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
वहीं, माता लक्ष्मी की पूजा के समय “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” और भगवान कुबेर के पूजन के लिए “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥” मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व है, लेकिन इसे अपनी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए:
क्या खरीदें:
सोना और आभूषण: समृद्धि और शुभता का प्रतीक।
चाँदी के सिक्के: लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्के खरीदकर पूजा करने की परंपरा।
नए बर्तन: पीतल और स्टील के बर्तन घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
माता लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमाएँ: दीपावली पूजन के लिए विशेष रूप से खरीदे जाते हैं।
झाड़ू और धनिया के बीज: झाड़ू को दरिद्रता दूर करने का और धनिए के बीज को धन-धान्य के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
कांच के बर्तन: इसे राहु से संबंधित और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
तेल और घी: इन्हें इस दिन खरीदना अपशकुन माना गया है।
काले रंग की वस्तुएं: यह नकारात्मकता को आकर्षित करती हैं।
धनतेरस की संध्या में घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। इस दिन यम दीपदान की भी खास परंपरा है। मान्यता है कि घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है।
आइए, इस धनतेरस पर अपने घरों के साथ हृदय में भी श्रद्धा और करुणा का दीप जलाएं, ताकि भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की कृपा से जीवन में आरोग्य, संपन्नता और सुख-शांति हमेशा बनी रहे।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और तथ्य धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और आम जनता के बीच प्रचलित कथाओं पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य केवल आपको सामान्य जानकारी देना है। किसी भी जानकारी या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।
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