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‘गीता पर हाथ रखकर कहें झूठ है’… पुलिस एक्शन के बीच हिमंता पर कांग्रेस का बड़ा हमला

गुवाहाटी : असम की सियासत में पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति विवाद ने मंगलवार को एक नया और बेहद नाटकीय मोड़ ले लिया है. एक तरफ असम पुलिस की टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर जांच के लिए पहुंची, तो दूसरी तरफ सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सार्वजनिक रूप से ‘भगवद्गीता’ पर हाथ रखकर सच बोलने की चुनौती दे दी है. 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है.


क्या है पूरा पवन खेड़ा और पासपोर्ट विवाद?

विवाद की जड़ें पवन खेड़ा के उन दावों में हैं, जो उन्होंने एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए थे:

  • तीन विदेशी पासपोर्ट: खेड़ा का दावा है कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास UAE, एंटीगुआ-बारबुडा और मिस्र के पासपोर्ट हैं.
  • 52,000 करोड़ के बिजनेस हित: आरोप लगाया गया है कि सरमा परिवार के अमेरिका में बड़े व्यापारिक हित हैं, जिनका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं है.
  • सियासी सवाल: खेड़ा ने सवाल किया कि मुस्लिम विरोध की राजनीति करने वाले सीएम के परिवार के पास दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं?

मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज FIR के बाद ही असम पुलिस की क्राइम ब्रांच पवन खेड़ा के घर पहुंची है.


गौरव गोगोई की ‘गीता शपथ’ चुनौती

असम कांग्रेस के दिग्गज नेता गौरव गोगोई ने इस विवाद को एक कदम आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री को धर्म और नैतिकता की कसौटी पर परखा है:

  • सार्वजनिक शपथ की मांग: गोगोई ने कहा कि अगर सीएम के परिवार पर लगे आरोप झूठे हैं, तो वे भगवद्गीता पर हाथ रखकर इसकी घोषणा करें.
  • खुद की संपत्ति पर सफाई: गोगोई ने कहा कि वे खुद गीता पर शपथ लेकर कह सकते हैं कि लंदन में उनकी कोई संपत्ति नहीं है.
  • सीधे सवाल: उन्होंने पूछा कि क्या रिनिकी भुइयां शर्मा के पास Dubai Golden Visa है और क्या परिवार का कोई सदस्य विदेश में गुप्त बिजनेस नेटवर्क चला रहा है?

हलफनामे और जांच की उठती मांग

गोगोई ने जोर देकर कहा कि चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने घोषणा की कि यदि असम में कांग्रेस की सरकार आती है, तो हिमंता सरमा के परिवार से जुड़े सभी विदेशी बिजनेस हितों और नेटवर्क की गहन जांच कराई जाएगी। यदि कुछ भी अवैध पाया गया, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह विवाद अब केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़े चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बन चुका है।

news desk

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