नई दिल्ली: मानसून के मौसम में बढ़ी हुई नमी और गंदे पानी के संपर्क में आने से पैरों में फंगल इन्फेक्शन, एथलीट फुट, खुजली और दाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। लंबे समय तक पैरों में नमी बने रहने से संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ घरेलू उपाय, साफ-सफाई और खानपान में बदलाव अपनाकर इस समस्या से राहत पाने में मदद मिल सकती है।
बरसात के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने के कारण फंगस तेजी से पनपता है। लगातार गीले जूते या मोजे पहनना, पैरों का लंबे समय तक गीला रहना, सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलना या दूसरे लोगों के जूते-चप्पल इस्तेमाल करना संक्रमण की आशंका बढ़ा सकता है। इस स्थिति में पैरों की उंगलियों के बीच खुजली, लाल चकत्ते, जलन और त्वचा छिलने जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. उपासना वोहरा के अनुसार, बरसात के मौसम में शरीर के कई हिस्सों जैसे पैरों की उंगलियों के बीच, इनर थाई, ब्रेस्ट के नीचे और अन्य नमी वाले क्षेत्रों में फंगल संक्रमण और दाद की समस्या हो सकती है। ऐसे में पुदीने की पत्तियों को पीसकर पानी के साथ पेस्ट तैयार करें और प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इससे खुजली और जलन में राहत मिल सकती है।
योग गुरु और आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बाबा रामदेव के अनुसार, जिन लोगों को बार-बार खुजली या फंगल संक्रमण की समस्या होती है, उन्हें नमक और चीनी का सेवन कम करना चाहिए। उनका कहना है कि रक्त में शुगर का स्तर अधिक होने पर कैंडिडा जैसे फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। एलोवेरा, नीम और गिलोय का सेवन प्राकृतिक रूप से शरीर की सफाई में सहायक माना जाता है और त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभ पहुंचा सकता है।
अगर पैरों में खुजली या फंगल संक्रमण हो गया है, तो नहाने के बाद पैरों को अच्छी तरह सुखाएं और खासतौर पर उंगलियों के बीच नमी बिल्कुल न रहने दें।
गुनगुने पानी में एक से दो चम्मच सिरका मिलाकर 5 से 10 मिनट तक पैरों को भिगोने के बाद अच्छी तरह पोंछ लें। सिरके में मौजूद एसिटिक एसिड त्वचा का पीएच स्तर बदलने में मदद करता है, जिससे फंगस के लिए अनुकूल वातावरण कम हो सकता है।
नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और उससे पैरों को धोएं। नीम में पाए जाने वाले एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
त्रिफला का काढ़ा बनाकर उससे पैरों की सफाई करना भी त्वचा को स्वच्छ रखने और संक्रमण का खतरा कम करने में उपयोगी माना जाता है।
बरसात के मौसम में पैरों की त्वचा पर नारियल तेल की हल्की मालिश करने से त्वचा को नमी मिलती है। कुछ शोधों के अनुसार, नारियल तेल में मौजूद लॉरिक एसिड और कैप्रिक एसिड में हल्के एंटीमाइक्रोबियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की सुरक्षा में सहायक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फंगल संक्रमण से बचाव के लिए पैरों को हमेशा साफ और सूखा रखना सबसे जरूरी है। साफ सूती मोजे पहनें, गीले जूते लंबे समय तक न पहनें और किसी अन्य व्यक्ति के जूते या चप्पल इस्तेमाल करने से बचें। यदि संक्रमण लगातार बना रहे, तेजी से फैलने लगे या दर्द और सूजन बढ़ जाए, तो चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
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