नई दिल्ली: वजन घटाने से लेकर दिल की सेहत तक, सूरजमुखी के बीज आजकल हेल्दी स्नैक के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से लोग इन्हें अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर रहे हैं। लेकिन अगर इन्हें गलत तरीके से खाया जाए, तो यही फायदेमंद बीज पाचन तंत्र के लिए परेशानी की वजह बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी के बीज का छिलका खा लेना सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
क्या छिलके समेत खाना सुरक्षित है?
आकाश हेल्थकेयर की हेड ऑफ डाइटेटिक्स डाइटिशियन गिन्नी कालरा के मुताबिक, सूरजमुखी के बीज के छिलके जहरीले नहीं होते, लेकिन इन्हें पचाना शरीर के लिए आसान नहीं होता। छिलकों में फाइबर की मात्रा अधिक और उनकी बनावट काफी कठोर होती है, जिससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए हमेशा छिलका हटाकर केवल अंदर का बीज ही खाना चाहिए।
पाचन तंत्र को कैसे पहुंचा सकता है नुकसान?
विशेषज्ञों के अनुसार सूरजमुखी के बीज की बाहरी परत खुरदरी और नुकीली होती है। अधिक मात्रा में छिलके समेत बीज खाने पर ये पाचन तंत्र में जमा होकर गुच्छे का रूप ले सकते हैं। इससे पेट और आंतों में जलन, कब्ज और गंभीर मामलों में आंतों में रुकावट जैसी समस्या भी हो सकती है। बच्चों में इसका खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
अगर छिलके समेत सूरजमुखी के बीज खाए जाते हैं, तो पेट दर्द, कब्ज, पेट भारी लगना और मल त्याग में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अधिकांश मामलों में समस्या हल्की होती है, लेकिन यदि दर्द या असुविधा लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
बार-बार छिलके खाने से बढ़ सकता है खतरा
डाइटिशियन गिन्नी कालरा के मुताबिक, लंबे समय तक नियमित रूप से छिलकों का सेवन करने से आंतों की अंदरूनी परत में लगातार घर्षण और जलन हो सकती है। इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है और बवासीर या गुदा में दरार जैसी परेशानियां भी गंभीर हो सकती हैं। हालांकि, इससे शरीर में कोई जहरीले तत्व नहीं पहुंचते, लेकिन पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है।
सूरजमुखी के बीज खाने का सही तरीका क्या है?
विशेषज्ञों की सलाह है कि सूरजमुखी के बीज का बाहरी छिलका पूरी तरह हटाकर केवल अंदर का बीज ही खाएं। अगर गलती से एक-दो छिलके निगल भी जाएं तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि लगातार पेट दर्द, उल्टी, कब्ज या मल त्याग बंद होने जैसी समस्या महसूस हो, तो इसे आंतों में रुकावट का संकेत मानते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।