पुणे: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पासिंग आउट परेड समारोह में कैडेटों को संबोधित करते हुए आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे की स्थिति में किस तरह निर्णायक प्रतिक्रिया देता है।
पुणे के खड़कवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में आयोजित एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड में कुल 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा बने। इनमें 12 देशों के 24 मित्र देशों के कैडेट भी शामिल रहे।
कैडेटों को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि आज के समय में खतरे पारंपरिक स्वरूप में सामने नहीं आते, बल्कि बदलते और जटिल रूपों में चुनौती पेश करते हैं। ऐसे में सशस्त्र बलों को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया है कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीक रणनीति और दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया जाता है, तो भारत किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब देने में सक्षम है। इस अभियान ने सैन्य कार्रवाई के लिए एक नया मानक स्थापित किया है, जिसे आगे भी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच मजबूत समन्वय और एकीकृत रणनीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल किसी एक सेना की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रयास और तालमेल का परिणाम होता है।
उन्होंने कहा कि एनडीए की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां कैडेट शुरुआत से ही तीनों सेनाओं के साथ मिलकर प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे उनमें एकीकृत दृष्टिकोण विकसित होता है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी सफलताओं की नींव इसी संयुक्त प्रशिक्षण और समन्वय में देखी जा सकती है।
सेना प्रमुख ने कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए उच्च मानकों को बनाए रखें और राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, ऐसे में आने वाली पीढ़ी पर बड़ी जिम्मेदारी है।
खेत्रपाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में 355 कैडेट भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल हुए। इनमें मित्र देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे, जो 12 अलग-अलग देशों से आए थे।
समारोह के दौरान कैडेटों का अनुशासन और प्रदर्शन सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। यह आयोजन सैन्य परंपरा और प्रशिक्षण की उत्कृष्टता का प्रतीक माना गया।
यह अवसर जनरल उपेंद्र द्विवेदी के लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 42 साल पहले वह स्वयं इसी अकादमी से पास आउट हुए थे और आज समीक्षा अधिकारी के रूप में लौटना उनके लिए गर्व का क्षण है।
उन्होंने बताया कि वह एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र रहे हैं और चार्ली स्क्वाड्रन का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि इसी संस्थान ने उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को आकार दिया।
अपने संबोधन के अंत में सेना प्रमुख ने कैडेटों से कहा कि वे एनडीए में मिले अनुशासन, प्रशिक्षण और मूल्यों को अपने पूरे सैन्य जीवन में बनाए रखें। उन्होंने कहा कि देश सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं बल्कि एक जीवन उद्देश्य होना चाहिए।
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