नई दिल्ली/तेहरान। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सियासत में भी हलचल तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच विदेश नीति को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों पर अभी तक तेहरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के बीच रणनीतिक मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विदेश नीति बना विवाद की जड़
रिपोर्ट्स में यह बात उभरकर सामने आई है कि ईरान की विदेश नीति को लेकर सरकार के भीतर अलग-अलग सोच काम कर रही है। आरोप है कि कुछ अहम कूटनीतिक फैसलों में समन्वय की कमी देखने को मिली है, जिससे सत्ता के शीर्ष स्तर पर असहजता बढ़ी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी देश पर बाहरी दबाव बढ़ता है, तो आंतरिक रणनीति को लेकर मतभेद भी सतह पर आने लगते हैं—ईरान के मौजूदा हालात को इसी नजर से देखा जा रहा है।
IRGC की भूमिका पर भी सवाल
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका को लेकर भी असहमति बनी हुई है। कहा जा रहा है कि कुछ फैसलों में सैन्य प्रभाव ज्यादा होने की आशंका जताई गई, जिससे राजनीतिक नेतृत्व और कूटनीतिक तंत्र के बीच दूरी बढ़ी।हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
संसद से उठे असंतोष के संकेत
संसद के भीतर भी हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को हवा दी है। बताया जा रहा है कि वार्ता प्रक्रिया से जुड़े एक अहम पद से हटने के बाद असंतोष खुलकर सामने आया। इसके बाद कूटनीतिक स्तर पर लिए गए कुछ फैसलों ने विवाद को और गहरा कर दिया।
क्या बदल सकती है ईरान की रणनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि अगर ये मतभेद गहराते हैं, तो ईरान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव पहले से ही चरम पर है, तेहरान के अंदरूनी समीकरण बेहद अहम हो जाते हैं।