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ईरान के मोर्चे पर अमेरिकी युद्धपोत के बुरे हाल! फफूंदी वाले शॉवर, टूटे टॉयलेट और खाने की कमी से बेहाल नाविक, समुद्र में कूदने की कोशिश का दावा

वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर नाविकों की मुश्किलें बढ़ने का दावा किया जा रहा है। परिवारों के मुताबिक, लंबे समय से जारी तैनाती, खाने की कमी और जहाज पर खराब सुविधाओं ने क्रू का मनोबल प्रभावित किया है। स्थिति इतनी गंभीर होने का दावा है कि कुछ नाविकों ने जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश तक की। हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।

लंबी तैनाती से टूट रहा नाविकों का हौसला

यूएसएस अब्राहम लिंकन करीब 210 दिनों से मिडिल ईस्ट में तैनात है। परिवारों का कहना है कि लगातार ड्यूटी, मुश्किल परिस्थितियों और तैनाती खत्म होने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं होने से नाविक मानसिक दबाव में हैं।

एनाबेल लोमा के पति भी कथित तौर पर जहाज से कूदने की कोशिश करने वाले नाविकों में शामिल थे। उन्होंने बताया कि उनके पति को डर है कि इस घटना के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। लोमा के मुताबिक, उन्हें कथित घटना की जानकारी जहाज के अधिकारी से मिली, जबकि अमेरिकी नौसेना की ओर से उन्हें सीधे कोई सूचना नहीं दी गई। उनके पति को फिलहाल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

एक अन्य रिपोर्ट में यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात कम से कम छह नाविकों के जहाज से कूदने की कोशिश करने का दावा किया गया है।

साथी नाविक ने समय रहते बचाई जान

एक कथित घटना में एक नाविक के साथी ने उसे समुद्र में जाने से रोक लिया। एक नाविक की पत्नी मारिया रोड्रिगेज के अनुसार, उनके पति ने साथी को ऐन वक्त पर पकड़ लिया और वापस डेक पर खींच लिया।

एक अन्य नाविक ने भी बताया कि जहाज की निगरानी पर तैनात कर्मचारियों ने हस्तक्षेप कर एक साथी को जहाज से कूदने से रोक दिया था। इन घटनाओं ने जहाज पर तैनात कर्मचारियों की मानसिक स्थिति को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

खाने की कमी से लेकर जरूरी सामान तक की शिकायत

परिवारों के मुताबिक, जहाज पर रहने की परिस्थितियां भी लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। एक रिपोर्ट में नाविकों की ओर से शिकायत किए जाने का दावा किया गया कि भोजन में उन्हें बेहद कम मात्रा में चावल और टॉर्टिला मिल रहे हैं। साबुन और टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कमी की बात भी सामने आई है।

यूएसएस अब्राहम लिंकन की मौजूदा तैनाती मई में समाप्त होनी थी, लेकिन इसे अनिश्चित समय के लिए आगे बढ़ा दिया गया। यह युद्धपोत नवंबर 2025 में सैन डिएगो से रवाना हुआ था और जनवरी में इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह करीब 250 दिन लगातार समुद्र में रह चुका है।

फफूंदी वाले शॉवर और टूटे टॉयलेट का भी दावा

परिवारों का कहना है कि नाविकों ने जहाज पर खराब टॉयलेट, फफूंदी लगे शॉवर और कई हफ्तों से लॉन्ड्री सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने इन दावों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। नौसेना की ओर से इतना कहा गया है कि नाविकों की मानसिक तैयारी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सैन डिएगो में पिछले सप्ताह हुई एक बैठक में करीब 200 परिवारों की मौजूदगी में अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ के सामने भी इन समस्याओं को उठाया गया।

अब दूसरे युद्धपोत को भेजने की तैयारी

अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस अब्राहम लिंकन को बदलने के लिए यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट भेजे जाने की बात कही है। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बदलाव कब तक होगा।

यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात एक नाविक के परिवार की सदस्य बॉनी यॉर ने जहाज पर मौजूद मानसिक दबाव को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, जहाज के डॉक्टर या चिकित्सक ने जल्द किसी बंदरगाह तक पहुंचने की जरूरत बताई थी, क्योंकि लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर नाविकों की मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

ईरान के साथ तनाव के बीच बढ़ा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ कमजोर शांति समझौता टूटने के बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमले जारी रहने का दावा किया गया है। विवाद का एक अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो कच्चे तेल के वैश्विक कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी मजबूत करने के साथ मिडिल ईस्ट में यूएसएस अब्राहम लिंकन समेत करीब 20 युद्धपोत तैनात किए हैं। ऐसे में लंबे समय तक समुद्र में रहने और लगातार सैन्य दबाव के बीच अमेरिकी नौसैनिकों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दूसरे अमेरिकी युद्धपोतों पर भी उठे थे सवाल

यूएसएस अब्राहम लिंकन से पहले इस साल यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस गेराल्ड फोर्ड पर भी सीवेज और भोजन से जुड़ी समस्याओं की खबरें सामने आई थीं। उस समय अमेरिकी नौसेना ने इन दावों को गलत बताया था।

मई में यूएसएस गेराल्ड फोर्ड पर आग लगने की घटना को लेकर भी ऐसी अटकलें सामने आई थीं कि इसे थके हुए नाविकों ने जानबूझकर अंजाम दिया हो सकता है। अमेरिकी नौसेना ने इस मामले की जांच शुरू की है।

ईरान के साथ जारी लंबे टकराव के बीच यूएसएस अब्राहम लिंकन को लेकर सामने आए ये दावे अमेरिकी नौसैनिकों की लंबी तैनाती, जहाज पर उपलब्ध सुविधाओं और उनके मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

vineet verma

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