मध्य पूर्व (Middle East) के समुद्री इलाकों से अमेरिकी नौसेना (US Navy) के शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर और डेस्ट्रॉयर अचानक गायब हो गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अमेरिका ने अपने जहाजों को पीछे हटा लिया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान की नई एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासिम बसीर’ (Qasem Basir) को माना जा रहा है। जानिए कैसे एक किफायती मिसाइल ने 13 अरब डॉलर वाले अमेरिकी युद्धपोतों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।
| विशेषताएं / मानक | ईरान की ‘कासिम बसीर’ मिसाइल | अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS Gerald R. Ford) |
| प्रकार / श्रेणी | एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल (कैरियर किलर) | फोर्ड-क्लास सुपरकैरियर (सुपर वॉरशिप) |
| अनुमानित लागत | बेहद कम (किफायती) | लगभग 13 अरब डॉलर |
| मारक क्षमता (रेंज) | लगभग 1,200 किलोमीटर | वैश्विक पहुंच (ईरान से 600+ नॉटिकल मील दूर रहने को मजबूर) |
| तकनीक | थर्मल और ऑप्टिकल सीकर (सटीक निशाना) | अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस और रडार सिस्टम |
| सामरिक प्रभाव | कम लागत में बड़े जहाजों को बेअसर करने में सक्षम | भारी लागत और जान-माल के जोखिम के कारण पीछे हटना पड़ा |
इस घटना ने साबित कर दिया है कि आधुनिक समुद्री युद्ध (Naval Warfare) में केवल आकार और ताकत ही काफी नहीं है। लंबी दूरी की सटीक और सस्ती मिसाइलें अब अरबों डॉलर के जहाजों के लिए काल बन रही हैं। अमेरिका ने नाकाबंदी की बात तो कही है, लेकिन अपने युद्धपोतों को दूर रखकर वह अब दूर से ही निगरानी रखने की कोशिश कर रहा है, जिससे उसकी समुद्री घेराबंदी की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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