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दूसरी शादी के बाद भी पहले पति से गुजारा भत्ता? हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश पर जताई हैरानी, जज से मांगा जवाब

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान झांसी की फैमिली कोर्ट के उस आदेश पर सवाल उठाया है, जिसमें पत्नी के पुनर्विवाह की जानकारी रिकॉर्ड पर होने के बावजूद पहले पति को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने झांसी के अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने झांसी के एडिशनल प्रधान जज, फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि वे बताएं कि जब आपत्ति-पत्र में पत्नी के दूसरे विवाह का स्पष्ट उल्लेख किया गया था, तब भी पहले पति को पत्नी के लिए प्रति माह 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश किस आधार पर पारित किया गया।

क्या है पूरा मामला?

मामले के अनुसार, पति-पत्नी के बीच 30 जुलाई 2025 को झांसी के अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय ने तलाक की डिक्री पारित की थी। इस फैसले के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। इसी दौरान तलाक के करीब एक महीने बाद पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया। पति का दावा है कि पत्नी ने अपने शपथपत्र में स्वयं पुनर्विवाह की जानकारी दी थी। इसके बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत चल रही गुजारा भत्ता की कार्यवाही में पति ने आपत्ति दाखिल कर तलाक की डिक्री और पत्नी के पुनर्विवाह का उल्लेख भी किया।

फिर भी गुजारा भत्ता देने का आदेश

पति की आपत्ति के बावजूद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह और पुत्र के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित कर दिया। इसके बाद पति ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि वह अपने पुत्र के भरण-पोषण की राशि देने के लिए तैयार है और उसका भुगतान भी कर रहा है, लेकिन पुनर्विवाह कर चुकी पत्नी को पहले पति से गुजारा भत्ता देने का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट ने कानून का भी किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अनुसार ‘पत्नी’ की परिभाषा में ऐसी महिला शामिल है, जिसे उसके पति ने तलाक दिया हो या जिसने पति से तलाक लिया हो, लेकिन जिसने दोबारा विवाह न किया हो।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 30 अक्टूबर 2025 को दाखिल आपत्ति में पत्नी के पुनर्विवाह का तथ्य सामने आने के बावजूद गुजारा भत्ता देने का आदेश क्यों पारित किया गया, इस पर फैमिली कोर्ट को जवाब देना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में पत्नी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है।

vineet verma

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