इजराइल–अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमलों ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इन्हीं हमलों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई, जिसने पहले से भड़के तनाव को और अधिक भड़का दिया।
इसके तुरंत बाद ईरान ने “सबसे भयंकर जवाबी कार्रवाई” (Most Ferocious Operation) की घोषणा की और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए दुबई, दोहा और बहरीन में मिसाइल हमले किए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मध्य-पूर्व में हालात और अधिक विस्फोटक हो गए हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह जंग कब थमेगी। अमेरिका की ओर से सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिए गए हैं कि ईरान को पूरी तरह कमजोर किए बिना वह पीछे नहीं हटेगा। हालांकि दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि वॉशिंगटन कूटनीतिक विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता।
वहीं ईरान की तरफ से साफ संदेश दिया गया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह का समझौता या वार्ता करने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट कहा है कि उनका देश “अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरानी अधिकारी वॉशिंगटन के साथ वार्ता फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
लारीजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं और वे अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार भी रह चुके हैं। रविवार को हुए संयुक्त हमले के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और हालात फिलहाल बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
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