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पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में बड़ा साफ-सफाया, लाखों नाम कटे, लेकिन अंडर एडजुडिकेशन ने बढ़ाई TMC-BJP की टकराहट

कोलकाता: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने 28 फरवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। लेकिन “अंतिम” शब्द के बावजूद यह कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। नई सूची के मुताबिक राज्य में अब कुल मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ रह गई है, जबकि SIR शुरू होने से पहले यह आंकड़ा 7.66 करोड़ था। यानी करीब 8.09 प्रतिशत नाम लिस्ट से हट चुके हैं। इसके साथ ही करीब 60 लाख से ज्यादा मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम अभी भी “अंडर एडजुडिकेशन” की श्रेणी में पड़े हैं और जिन पर फैसला होना बाकी है।

ECI की प्रेस नोट के अनुसार, ड्राफ्ट रोल (16 दिसंबर 2025) में 7.08 करोड़ नाम थे, लेकिन जांच के दौरान मृतक, प्रवासी, डुप्लिकेट और अन्य अयोग्य प्रविष्टियों को हटाया गया। करीब 5.46 लाख नाम फॉर्म-7 के तहत डिलीट किए गए हैं। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के मुताबिक, 60,06,675 मामलों की जांच अभी चल रही है और जैसे ही न्यायिक अधिकारियों से हरी झंडी मिलेगी, इन नामों को सप्लीमेंट्री लिस्ट के जरिए जोड़ा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की एंट्री क्यों हुई जरूरी

SIR प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में दावे और आपत्तियों की संख्या करीब 80 लाख तक पहुंच गई थी। इतने बड़े पैमाने पर मामलों को निपटाने के लिए सिर्फ 250 स्थानीय न्यायिक अधिकारी नाकाफी साबित हो रहे थे और अंदेशा था कि प्रक्रिया 80 दिनों से भी ज्यादा खिंच सकती है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) को दखल देना पड़ा। 20 और 24 फरवरी 2026 के आदेशों में कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को झारखंड और ओडिशा से सेवारत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की इजाजत दी। अब लगभग 500 न्यायिक अधिकारी इस काम में लगे हैं। कोर्ट ने साफ किया कि ये अधिकारी ECI के दिशानिर्देशों के तहत काम करेंगे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी।

राजनीति गरम, मतदाताओं की चिंता

इस पूरी कवायद ने सियासी माहौल भी गर्म कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) और बीजेपी (Bharatiya Janata Party) दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन TMC ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप भी लगाया है। TMC नेता Kapil Sibal ने कोर्ट में यह मुद्दा उठाया कि न्यायिक अधिकारियों को ECI द्वारा ट्रेनिंग देना आदेश का उल्लंघन है, हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। खास तौर पर मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में “अंडर एडजुडिकेशन” वाले मामलों की संख्या ज्यादा होने से बहस और तेज हो गई है।

आम मतदाताओं के लिए सलाह यही है कि वे अपना नाम ECI की वेबसाइट voters.eci.gov.in या CEO वेस्ट बंगाल पोर्टल ceowestbengal.nic.in पर जाकर जरूर चेक करें। जिनके नाम “अंडर एडजुडिकेशन” में हैं, उनका स्टेटस जल्द अपडेट होगा। वहीं 18 साल पूरे कर चुके नए मतदाता फॉर्म-6 या 6A के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को साफ और भरोसेमंद बनाने की यह एक बड़ी कवायद है। अंतिम सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी, लेकिन तब तक यह मुद्दा राजनीति और जनता—दोनों के बीच चर्चा में बना रहेगा।

news desk

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