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भीषण गर्मी से हांफ रहे AI डेटा सेंटर! बढ़ता तापमान बना संकट, टेक कंपनियों के सामने खड़ा हुआ नया खतरा

नई दिल्ली: तेज होती गर्मी और बदलते मौसम का असर अब सिर्फ इंसानों या शहरों तक सीमित नहीं रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार को ताकत देने वाले विशाल डेटा सेंटर भी अब तापमान के दबाव में आने लगे हैं। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम को लगातार ठंडा बनाए रखने की बन गई है। बढ़ती गर्मी ने संचालन लागत बढ़ा दी है और कंपनियों को नई तकनीकों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की ओर जाने के लिए मजबूर कर दिया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई आधारित डेटा सेंटर सामान्य सर्वर की तुलना में कहीं ज्यादा ऊर्जा और कूलिंग क्षमता की मांग करते हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन और लंबे समय तक पड़ने वाली गर्मी अब इनके संचालन के लिए गंभीर चुनौती बन रही है।

AI चिप्स की गर्मी बन रही सबसे बड़ी चुनौती

एआई डेटा सेंटर में अत्यधिक क्षमता वाली चिप्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो काम के दौरान बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करती हैं। इन्हें लगातार नियंत्रित तापमान में रखना जरूरी होता है, क्योंकि ज्यादा तापमान उपकरणों की कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

डेटा सेंटर के संचालन में बड़ी मात्रा में बिजली और पानी का उपयोग किया जाता है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा केवल कूलिंग सिस्टम को चलाने में खर्च होता है, ताकि चिप्स सुरक्षित तापमान पर काम करती रहें।

बढ़ती बिजली मांग से ब्लैकआउट का बढ़ रहा जोखिम

डेटा सेंटर की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। गर्म मौसम में शहरों में पहले से बिजली की मांग बढ़ जाती है, जिससे अतिरिक्त दबाव पावर सिस्टम पर पड़ता है।

रिपोर्टों के अनुसार, डेटा सेंटर की कुल बिजली खपत का बड़ा हिस्सा केवल तापमान नियंत्रण पर खर्च होता है। ऐसे हालात में बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है, जो एआई सिस्टम के संचालन को प्रभावित कर सकता है।

कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान के कारण बिजली ढांचे पर असर भी देखने को मिला है, जिससे लगातार आपूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन रहा है।

अब मौसम से लड़ रहे हैं डेटा सेंटर

गर्मी के अलावा तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बदलते मौसम के पैटर्न भी डेटा सेंटर के लिए नई परेशानी बनकर सामने आए हैं।

कई कंपनियां अपने डेटा सेंटर को बड़े शहरों से दूर स्थापित कर रही हैं, ताकि बिजली और जमीन की उपलब्धता बेहतर हो सके। हालांकि दूरस्थ क्षेत्रों में मौसम संबंधी जोखिम अलग प्रकार की चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। कई जगहों पर कूलिंग सिस्टम और बाहरी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।

क्यों बढ़ रही टेक कंपनियों की चिंता?

जलवायु जोखिम बढ़ने के साथ अब डेटा सेंटर तैयार करने की लागत भी बढ़ रही है। कंपनियों को लोकेशन चुनने से लेकर कूलिंग सिस्टम और ऊर्जा बैकअप तक हर स्तर पर अतिरिक्त निवेश करना पड़ रहा है।

एआई सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि उनके डेटा सेंटर हर मौसम में बिना रुकावट काम कर सकें।

नई तकनीक और डिजाइन पर बढ़ा जोर

बढ़ते तापमान के असर को कम करने के लिए कई बड़ी टेक कंपनियां डेटा सेंटर के डिजाइन में बदलाव कर रही हैं। नई कूलिंग तकनीक, रियल टाइम निगरानी और उन्नत तापमान नियंत्रण व्यवस्था अपनाई जा रही है।

कुछ कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं जो ज्यादा तापमान में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए उन्नत कूलिंग तकनीकों और ऊर्जा दक्ष मॉडल पर काम किया जा रहा है ताकि संचालन लागत को भी नियंत्रित किया जा सके।

vineet verma

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