विश्व क्रिकेट में फिलहाल भारतीय टीम की स्थिति कमजोर दिख रही है. टीम इंडिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और टेस्ट में कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा के न होने से बल्लेबाजी क्रम में अनुभव की कमी साफ नजर आ रही है. इसी कारण दक्षिण अफ्रीका ने भारत को टेस्ट सीरीज में 2-0 से मात दी.
वन-डे सीरीज की शुरुआत में टीम इंडिया को पहले मैच में जीत मिली, लेकिन मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा. दूसरे वन-डे में भारत ने 359 रन बनाए, लेकिन टीम को हार का सामना करना पड़ा.
विशेषज्ञों के अनुसार, राहुल द्रविड़ के कोचिंग पैटर्न और गंभीर के प्रयोग टीम इंडिया के लिए परेशानी का कारण बने हैं. गुवाहाटी टेस्ट में उन्होंने तीन विकेटकीपर-बल्लेबाज और तीन ऑलराउंडर्स को टीम में शामिल किया, लेकिन ये प्रयोग भारी साबित हुआ.टेस्ट के अंतिम दिन बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं पाए.
वन-डे सीरीज में भी इसी प्रयोग के असर दिखे.टीम की गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों कमजोर हुई, और फिनिशर की भूमिका पर सवाल उठने लगे. पहले यह जिम्मेदारी रैना और धोनी संभालते थे, बाद में हार्दिक पांड्या ने निभाई, लेकिन गंभीर के आने के बाद लगातार बदलाव देखने को मिले.
छठे और सातवें नंबर पर कई बदलाव किए गए। दीपक हुड्डा, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल को छठे नंबर पर खेलाया गया, जबकि हार्दिक पांड्या, सूर्यकुमार यादव और केएल राहुल ने पिछले पांच साल में इस नंबर पर खेला.
केएल राहुल ने रांची में 56 गेंद पर 60 रन की पारी खेली, लेकिन रायपुर में छठे नंबर पर वॉशिंगटन सुंदर को भेजा गया, जिन्होंने केवल 8 गेंद पर 1 रन बनाया. इससे पहले सुंदर ने रांची में पांचवें नंबर पर 19 गेंद में 13 रन बनाए थे.
गेंदबाजी भी कमजोर नजर आई। सिराज, बुमराह और शमी की गैरमौजूदगी के कारण टीम इंडिया की गेंदबाजी लाइन कमजोर हुई.दूसरी ओर, शमी को फिट होने के बावजूद लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि टीम भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार कर रही है। शमी अभी अगले 2-3 साल तक टीम को अपनी सेवाएं दे सकते हैं और अपनी घातक गेंदबाजी से कई बार टीम को जीत दिला चुके हैं.इसके बावजूद उन्हें मौजूदा समय में मौके नहीं मिल रहे हैं.