Trending News

क्या सगे बेटे से गुजारा भत्ता मिलने के बाद सौतेले बेटे से भी कर सकते हैं मांग? हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी मां को उसके सगे बेटे से पहले ही गुजारा भत्ता मिल रहा है, तो वह उसी आधार पर अपने सौतेले बेटे से भी भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

मामला उस महिला से जुड़ा था, जिसे फैमिली कोर्ट ने उसके सगे बेटे से हर महीने 8,000 रुपये भरण-पोषण दिलाने का आदेश दिया था। महिला इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी और उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सौतेले बेटे को भी समान रूप से भरण-पोषण देने के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग की थी।

क्या था पूरा मामला?

फैमिली कोर्ट ने 15 मई 2025 को महिला के सगे बेटे को प्रति माह 8,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए दलील दी कि उसके दिवंगत पति का बेटा होने के कारण सौतेले बेटे पर भी उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी मां को उसके सगे बेटे से पहले ही भरण-पोषण मिल रहा है, तो उसे स्वयं का पालन-पोषण करने में असमर्थ नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में वह किसी अन्य व्यक्ति से उसी आधार पर गुजारा भत्ता पाने की पात्र नहीं रहती।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के भरण-पोषण की जिम्मेदारी एक से अधिक लोगों पर बनती है और मामला अदालत के सामने आता है, तो परिस्थितियों के अनुसार यह तय करना न्यायालय का अधिकार होगा कि किस व्यक्ति से और कितनी राशि दिलाई जाए।

महिला की दलील क्या थी?

महिला की ओर से कहा गया कि फैमिली कोर्ट ने पूरी जिम्मेदारी केवल उसके सगे बेटे पर डाल दी, जबकि सौतेले बेटे को इस दायित्व से मुक्त कर दिया। याचिका में दोनों बेटों को समान रूप से भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग की गई थी।

सौतेले बेटे ने किया विरोध

सौतेले बेटे की ओर से अदालत में कहा गया कि जब महिला का सगा बेटा मौजूद है और उसे पहले ही भरण-पोषण देने का आदेश दिया जा चुका है, तब उस पर अतिरिक्त कानूनी दायित्व नहीं डाला जा सकता। राज्य सरकार ने भी इसी पक्ष का समर्थन किया।

याचिका खारिज करते हुए अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने महिला की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि याचिका का उद्देश्य केवल सौतेले बेटे को परेशान करना प्रतीत होता है।

vineet verma

Recent Posts

त्योहारों से ठीक पहले रेलवे का धमाकेदार सरप्राइज: 11 लाख से ज्यादा कर्मियों की चमकेगी किस्मत!

दीपावली के ठीक पहले देश के करोड़ों रेलकर्मियों के लिए एक ऐसी खुशखबरी सामने आई…

4 hours ago

Meerut Blue Drum Case: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, जानें कोर्ट ने क्यों सुनाया फैसला

उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद एक…

5 hours ago

UP IAS Transfer: यूपी में 7 आईएएस अफसरों के तबादले, आजमगढ़-आगरा को मिले नए CDO; DGME की नियुक्ति के नियम भी बदले

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए सात आईएएस…

5 hours ago

Iran-US Tension: होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की खुली धमकी, अरब सागर में अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर; भारत पर क्या होगा असर?

ईरानी कमांडर ने अमेरिकी युद्धपोतों को दी डुबोने की चेतावनी, मिसाइलों और ड्रोन के दम…

6 hours ago

चुनाव आयोग की बढ़ी मुश्किलें! री-काउंटिंग की रिकॉर्डिंग न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन

लोकतंत्र के सबसे बड़े प्रहरी चुनाव आयोग की एक लापरवाही पर देश की सर्वोच्च अदालत…

6 hours ago

26/11 की अनसुनी कहानी लेकर आ रही ‘प्रहार’, उज्ज्वल निकम के रोल में दिखेंगे राजकुमार राव

26/11 का वह काला दिन, जब गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से मुंबई कांप उठी…

7 hours ago