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11% टूटा अडानी एंटरप्राइजेज शेयर, अमेरिकी SEC की गौतम अडानी को सीधे समन जारी करने की मांग से बाजार में हड़कंप !

मुंबई: अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर शुक्रवार को 11% तक गिरकर निवेशकों में भारी घबराहट पैदा कर दी। यह गिरावट अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (US SEC) द्वारा न्यूयॉर्क की अदालत में दाखिल याचिका के बाद आई है, जिसमें SEC ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को सीधे ईमेल के जरिए समन जारी करने की अनुमति मांगी है। इस घटना से अडानी ग्रुप की कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 12.5 अरब डॉलर (लगभग ₹1.05 लाख करोड़) से अधिक घट गया है।

रॉयटर्स, द हिंदू, सीएनबीसी और अन्य प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SEC ने नवंबर 2024 में खोली गई सिविल फ्रॉड और ब्राइबरी केस में गौतम अडानी, सागर अडानी और अन्य अधिकारियों को समन भेजने की कोशिश की थी। लेकिन भारतीय सरकार की ओर से सहयोग न मिलने के कारण SEC अब वैकल्पिक तरीके (ईमेल) से समन जारी करने की मांग कर रही है। SEC का आरोप है कि अडानी ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देकर भारतीय अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए गए।

शेयर बाजार पर प्रभाव:

  • अडानी एंटरप्राइजेज — 11% गिरकर ₹1,862-₹1,864 के स्तर पर बंद (पिछले दिन ₹2,087.50 से गिरावट)।
  • अडानी ग्रीन एनर्जी — 12-14% तक टूटा।
  • अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस — 12% गिरावट।
  • अन्य ग्रुप कंपनियां जैसे अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर आदि में 5-10% तक की गिरावट दर्ज की गई।

अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को बेबुनियाद” करार देते हुए कहा है कि वे सभी कानूनी रास्तों से अपना बचाव करेंगे। ग्रुप ने पहले भी कहा था कि गौतम अडानी और सागर अडानी पर कोई रिश्वत या भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है, और यह मामला अमेरिकी कानूनों के तहत ग्रुप की ग्रीन एनर्जी कंपनी पर केंद्रित है।

विशेषज्ञों की राय

यह घटना 2023 की हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से अडानी ग्रुप पर लगातार चल रहे कानूनी दबाव को और बढ़ा रही है।निवेशकों में चिंता है कि अगर SEC को समन जारी करने की अनुमति मिली, तो जांच आगे बढ़ सकती है और ग्रुप की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, क्योंकि अडानी ग्रुप की मजबूत बिजनेस ग्रोथ और सरकारी परियोजनाओं में हिस्सेदारी बरकरार है।

यह मामला भारत-अमेरिका के बीच कानूनी सहयोग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भी सवाल उठा रहा है। SEC ने भारतीय कानून मंत्रालय द्वारा दो बार समन देने से इनकार करने का हवाला दिया है।

अधिक जानकारी के लिए अडानी ग्रुप की आधिकारिक वेबसाइट, NSE/BSE या SEC की फाइलिंग्स देखें। बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि की दृष्टि से फैसला लेने की सलाह दे रहे हैं।

news desk

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