जानें कीटो डाइट का पूरा सच
आज के दौर में फिट रहने की रेस में लोग तरह-तरह के डाइट प्लान अपना रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘कीटो डाइट’ की है। सेलिब्रिटीज से लेकर फिटनेस फ्रीक्स तक, हर कोई तेजी से वजन घटाने के लिए इसे रामबाण मान रहा है। लेकिन क्या यह वाकई सुरक्षित है? हालिया रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय कुछ और ही इशारा कर रही है।
क्या है कीटो डाइट?
कीटोजेनिक डाइट एक ऐसा आहार है जिसमें फैट बहुत ज्यादा, प्रोटीन मध्यम और कार्बोहाइड्रेट बेहद कम होता है। सामान्य तौर पर हमारा शरीर ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट का इस्तेमाल करता है। लेकिन जब हम कार्ब्स लेना बंद कर देते हैं, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा हुए फैट को जलाना शुरू कर देता है। इस मेटाबॉलिक स्थिति को ‘कीटोसिस’ कहा जाता है।
क्यों है ये इतनी लोकप्रिय?
शरीर सीधे फैट बर्न करता है, जिससे वजन बहुत जल्दी कम होता है। कार्ब्स कम होने के कारण इंसुलिन लेवल संतुलित रहता है, जो टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए शुरुआती तौर पर फायदेमंद हो सकता है। मूल रूप से इस डाइट का आविष्कार 1920 के दशक में मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए किया गया था।
रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले खतरे
हाल ही में हुए रिसर्च और 2026 की कुछ मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, कीटो डाइट के लंबे समय तक इस्तेमाल से गंभीर नुकसान हो सकते हैं, हाई फैट डाइट के कारण शरीर में ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (LDL) बढ़ सकता है, जिससे धमनियां ब्लॉक होने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है की वजन घटाने के लिए कीटो डाइट एक इफेक्टिव तरीका हो सकता है, लेकिन ये एक ‘क्विक फिक्स’ ज्यादा है। टिकाऊ स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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