विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को उस समय एक अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गया, जब मंदिर के गर्भगृह पर ताला लगा दिया गया। हाई पावर्ड कमेटी (HPC) की 12वीं बैठक के बाद लिए गए निर्णयों के विरोध में सेवायत गोस्वामी समाज ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में तनाव का माहौल है और श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी गहरा धक्का लगा है।
क्या रही विवाद की जड़
प्रशासनिक दखल और मंदिर के प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ समय से खींचतान चल रही थी। हाई पावर्ड कमेटी द्वारा प्रस्तावित नई नियमावली और दर्शन के बदलते स्वरूप को सेवायत गोस्वामी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं पर प्रहार मान रहे हैं। बुधवार को यह गुस्सा उस समय उग्र हो गया जब प्रशासन के रवैये से नाराज सेवायतों ने गर्भगृह के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया।
घटना के प्रमुख बिंदु
प्रशासनिक निर्णय: हाई पावर्ड कमेटी की बैठक में मंदिर में भीड़ नियंत्रण और दर्शन व्यवस्था को लेकर कुछ कड़े निर्णय लिए गए थे।
गोस्वामी समाज का आरोप है कि प्रशासन बिना उन्हें विश्वास में लिए मंदिर की मर्यादा और निजी स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रहा है। विवाद के कारण मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन में व्यवधान आया, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालु घंटों परेशान रहे।
वर्तमान स्थिति और आक्रोश
गर्भगृह पर ताला लगने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु मंदिर के बाहर एकत्र हो गए। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, लेकिन सेवायत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
आगे क्या?
प्रशासन इस मामले को सुलझाने के लिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है, वहीं गोस्वामी समाज का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को नहीं माना जाता और परंपराओं के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।