ED ने पश्चिम बंगाल में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए नदिया जिले के चकदाह गांव निवासी इंदुभूषण हलदर उर्फ दुलाल को गिरफ्तार किया है. इस रैकेट में 250 से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने का आरोप है, जिसमें पाकिस्तानी एजेंट आजाद हुसैन की कथित भूमिका सामने आई है. ईडी ने 13 अक्टूबर को कोलकाता से हलदर को गिरफ्तार किया. चकदाह, जो भारत-बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है, लंबे समय से अवैध प्रवास और फर्जी दस्तावेज रैकेट का केंद्र रहा है. जांच में पता चला कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड आजाद हुसैन उर्फ आजाद मलिक, एक पाकिस्तानी नागरिक था, जिसे अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किया गया था. वह भारत में फर्जी पहचान के साथ सक्रिय था और बांग्लादेशी नागरिकों को पैसे के बदले भारतीय दस्तावेज मुहैया कराता था.
ऐसे काम करता था ये नेटवर्क
हलदर ने स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क को संचालित किया. आजाद हुसैन बांग्लादेशी प्रवासियों से पैसे लेकर उन्हें हलदर के पास भेजता था. हलदर ने नकली आधार कार्ड, वोटर आईडी और निवास प्रमाणपत्र बनवाकर इनके आधार पर पासपोर्ट जारी करवाए. इस रैकेट से हलदर ने भारी मुनाफा कमाया, जिसके लिए उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ है. कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हलदर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद ईडी ने उसे हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की, जिसमें हलदर ने हुसैन से मुलाकात की बात स्वीकारी. आजाद हुसैन जून 2025 में दायर आरोपपत्र के तहत न्यायिक हिरासत में है.
खतरे की आशंका
ED का कहना है कि यह नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था, क्योंकि इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश के एजेंटों को भारतीय पहचान हासिल करने का रास्ता मिला. जांच जारी है, और एजेंसी अन्य संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी है. यह घटना सीमाई इलाकों में फर्जी दस्तावेज रैकेट की गहराई को उजागर करती है.