लेबनान के संगठन हिज़्बुल्लाह ने शनिवार को अपने दिवंगत नेता हसन नसरल्लाह की पहली बरसी पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए. बीते साल बेरूत के दक्षिणी इलाके में हुए इज़राइली हवाई हमले में नसरल्लाह की मौत ने न सिर्फ संगठन को, बल्कि पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया था.
एक हमला और नसरल्लाह का अंत!
27 सितंबर 2024 को बेरूत में हुए एक बड़े हमले में हिज़्बुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह मारे गए थे. कुछ ही हफ्तों में उनके उत्तराधिकारी हाशिम सफीउद्दीन की भी हत्या कर दी गई और उनके क्षेत्रीय सहयोगी, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद, सत्ता से बेदखल कर दिए गए. नसरल्लाह की मौत के बाद हिज़्बुल्लाह पर हथियार छोड़ने और खुद को केवल राजनीतिक दल के रूप में सीमित करने का दबाव बढ़ा है. लेकिन नए महासचिव नईम क़ासिम ने स्पष्ट कहा, “जब तक खतरा मौजूद है, विद्रोह ज़रूरी है।”
क्यों अहम थे नसरल्लाह?
1992 में मात्र 35 वर्ष की उम्र में संगठन की कमान संभालने वाले नसरल्लाह ने हिज़्बुल्लाह को एक छाया संगठन से लेबनान की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य ताकत में बदल दिया. साल 2000 में इस्राइली सेना की वापसी और 2006 के युद्ध को उन्होंने ‘ईश्वरीय विजय’ बताया था. हिज़्बुल्लाह ने उनके नेतृत्व में सीरिया, यमन और गाज़ा तक अपनी पहुंच बनाई. 2023 में जब हमास ने इस्राइल पर हमला किया, तो हिज़्बुल्लाह ने भी लेबनान की सीमा से मोर्चा खोल दिया. एक साल तक चली झड़पें अंततः एक व्यापक युद्ध में बदल गईं, जिसमें हजारों लोग मारे गए.
इस साल नसरल्लाह की बरसी पर ‘पिज़्जन रॉक्स’ पर उनकी और सफीउद्दीन की तस्वीरें प्रोजेक्ट की गईं. यह प्रदर्शन सरकार की अनुमति के बिना हुआ, जिससे हिज़्बुल्लाह विरोधियों में आक्रोश फैल गया. आलोचकों ने कहा कि ‘राष्ट्रीय प्रतीकों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए’.
बेरूत, दक्षिण लेबनान और बेक़ा घाटी में भारी भीड़ उमड़ी. इससे ये संकेत गया कि अभी भी लोगों का साथ हिज्बुल्लाह के साथ बना हुआ है. या फिर उसके समर्थक अभी टूटे नहीं है. लेकिन नसरल्लाह जैसी दूसरी शख्सियत अगर हिज्बुल्लाह को नहीं मिली तो आने वाले समय में हिज्बुल्लाह अपनी प्रासंगिकता बनाए रख पाएगी.