जुलाई की शुरुआत में झमाझम बारिश के बाद पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में मानसून पर मानो ब्रेक सा लग गया था। सूरज के तीखे तेवर और उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लेकिन अब मौसम विभाग और सैटेलाइट तस्वीरों से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर आ रही है। बंगाल की खाड़ी में एक नई हलचल शुरू हो चुकी है, जो बहुत जल्द मानसून को दोबारा एक्टिव मोड में लाने वाली है।
क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
दरअसल, प्रशांत महासागर में पैदा हुआ एक मौसमी डिस्टर्बेंस अब बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुका है। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो यह सिस्टम हवा को तेजी से ऊपर की तरफ धकेल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सिस्टम अगले 2 से 3 दिनों में ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों से टकराएगा।

क्या होगा असर?
शुरुआत में इसके प्रभाव से पूर्वी भारत में भारी बारिश होगी, और फिर धीरे-धीरे अगले कुछ हफ़्तों में यह नमी मध्य भारत:(मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़” और उत्तर भारत “यूपी, बिहार, दिल्ली-NCR” की तरफ बढ़ेगी।
क्यों जरूरी था मानसून का दोबारा लौटना?
जुलाई के दूसरे हफ्ते में मानसून के धीमे पड़ने से न केवल आम लोग बेहाल थे, बल्कि इसका सीधा असर देश की रीढ़ यानी कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा था।
खरीफ फसलों पर संकट: धान, मक्का और बाजरा जैसी खरीफ फसलों की बुआई इस समय जोरों पर होती है। बारिश न होने से कई इलाकों में बुआई का काम काफी धीमा पड़ गया था।
गर्मी का टॉर्चर: हवा में नमी का स्तर बढ़ने के कारण ‘फील्स लाइक’ टेम्परेचर काफी ज्यादा महसूस हो रहा था, जिससे यह नई मानसूनी एक्टिविटी ही राहत दिला सकती है।

El Niño का बढ़ता खतरा
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस साल ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर का तापमान पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है।
विशेष रूप से ‘नीनो 3.4’ क्षेत्र (जिसके जरिए वैज्ञानिक ला नीना और अल नीनो का आकलन करते हैं) में तापमान बढ़ने के संकेत मिले हैं। अल नीनो के एक्टिव होने से आमतौर पर मानसून कमजोर पड़ता है और गर्मी बढ़ती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में बंगाल की खाड़ी में इस नए सिस्टम का बनना किसी वरदान से कम नहीं है।
अब आगे क्या?
IMD एक्सपर्ट्स का कहना है की पूर्वी भारत में जल्द ही मौसम का मिजाज बदलने वाला है, जिसके बाद ठंडी हवाएं और मानसूनी बौछारें उत्तर और मध्य भारत का रुख करेंगी।