नई दिल्ली: शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। उनकी पूजा को लेकर लोगों के मन में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यह है कि क्या महिलाएं शनि देव की पूजा कर सकती हैं और शनिवार का व्रत रख सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं के लिए शनि पूजा वर्जित नहीं है, लेकिन पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना गया है।
महिलाएं श्रद्धा के साथ कर सकती हैं शनि पूजा
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य दोषों से राहत पाने के लिए पूजा, व्रत, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है। महिलाओं के लिए भी शनि देव की आराधना करने पर कोई रोक नहीं है। वे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ शनिवार का व्रत रख सकती हैं और शनि देव की पूजा कर सकती हैं।
पूजा में पवित्रता का रखें विशेष ध्यान
शनिवार के दिन शनि पूजा करते समय तन और मन की पवित्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं को विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दौरान शनि कथा का श्रवण, शनि आरती, शनि मंत्रों का जाप और श्रद्धापूर्वक आराधना करना शुभ माना जाता है।
प्रतिमा को स्पर्श करने से बचने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को शनि देव की प्रतिमा को स्पर्श नहीं करना चाहिए। पूजा के समय प्रतिमा के ठीक सामने खड़े होकर आराधना करने के बजाय दाईं या बाईं ओर बैठकर या खड़े होकर पूजा करना शुभ माना जाता है। साथ ही शनि देव की प्रतिमा की आंखों में सीधे देखने से भी बचने की मान्यता है।
तेल अर्पित करने और मंदिर जाने के नियम
मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को स्वयं शनि देव पर तेल अर्पित नहीं करना चाहिए। यदि तेल चढ़ाना हो तो किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से अर्पित करवाना उचित माना जाता है। वहीं ऋतुकाल और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को शनि मंदिर जाने से बचने की सलाह भी धार्मिक परंपराओं में दी गई है।
शनि कृपा के लिए करें ये उपाय
शनिवार के दिन महिलाएं शनि से संबंधित वस्तुओं का दान कर सकती हैं। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना, शनि मंत्र का जाप करना, शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायता मिल सकती है।