अयोध्या। भव्य राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे की गिनती करने वाली व्यवस्था इस वक्त बड़े प्रशासनिक और वित्तीय संकट से घिर गई है। एक तरफ जहाँ एसआईटी (SIT) की जांच में दान चोरी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले 20 से अधिक कर्मचारियों ने पेमेंट न मिलने से नाराज होकर एक साथ सामूहिक इस्तीफा (Mass Resignation) दे दिया है।
- चोरी का पैसा शेयर बाजार में: दान पेटी से चोरी की गई रकम को आरोपी शेयर बाजार (Stock Market) में लगाते थे और लोगों को ब्याज पर देते थे।
- ट्रस्ट के पूर्व सदस्य रडार पर: एसआईटी ने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को सीधे तौर पर सुरक्षा में लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है।
- ठप होने की कगार पर काउंटिंग: 20 से ज्यादा कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद अब दो शिफ्ट की जगह केवल एक ही शिफ्ट में चढ़ावे की गिनती होगी।
शेयर बाजार और ब्याज पर घुमाया जा रहा था भगवान का दान
एसआईटी (SIT) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राम मंदिर दान चोरी मामले में हैरान करने वाले एंगल सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी दान में से चोरी किए गए पैसों का एक बड़ा हिस्सा मुनाफा कमाने के लिए शेयर बाजार में इनवेस्ट कर रहे थे। इसके अलावा, इस रकम को स्थानीय स्तर पर लोगों को भारी ब्याज (सूद) पर उधार भी दिया जा रहा था। पुलिस अब आरोपियों के करीबियों और मददगारों के बैंक अकाउंट्स खंगाल रही है।
‘अधिकारियों की मिलीभगत से टूटे सुरक्षा नियम’
SIT की रिपोर्ट में सीधे तौर पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
“अनिल मिश्रा के पास फाइनेंस और नकदी कलेक्शन की पूरी जिम्मेदारी थी। उन्हें अंदरूनी सूत्रों से पता था कि काउंटिंग रूम में जाने वाले कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जा रही है, फिर भी उन्होंने कोई लिखित आदेश जारी नहीं किए। बायोमेट्रिक अटेंडेंस, बिना जेब वाले ड्रेस कोड और सीसीटीवी नियमों को ताक पर रखने के कारण ही इतनी बड़ी चोरी संभव हो सकी।”
बढ़ा वर्कलोड, नहीं मिली सैलरी; कर्मचारियों ने छोड़ा काम
इस पूरे विवाद और अव्यवस्था के बीच, ग्राउंड लेवल पर नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। 20 से ज्यादा कर्मचारियों ने काम का दबाव बढ़ाए जाने और समय पर पेमेंट न मिलने का आरोप लगाते हुए एक साथ इस्तीफा दे दिया।
काउंटिंग व्यवस्था में हुए बड़े बदलाव
- शिफ्ट्स हुईं बंद: पहले सुबह 8 से दोपहर 2 बजे और दोपहर 2 से रात 8 बजे तक दो अलग-अलग शिफ्ट्स में काउंटिंग होती थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है।
- नया समय: अब दोनों शिफ्ट के बचे हुए महज 15-16 कर्मचारियों को मर्ज करके सिर्फ एक शिफ्ट (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक) बनाई गई है।
- बढ़ा तनाव: नए स्टाफ की भर्ती होने तक बचे हुए मुट्ठी भर कर्मचारियों पर काम का भारी बोझ रहेगा, जिससे रोजाना के चढ़ावे का हिसाब रखने में देरी हो सकती है।