नई दिल्ली: मानसून के दौरान भारी बारिश, आंधी-तूफान और खराब मौसम का सबसे ज्यादा असर हवाई सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में कई बार उड़ानें देर से चलती हैं या रद्द कर दी जाती हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में यात्रियों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पैसेंजर चार्टर ऑफ राइट्स और डीजीसीए के नियमों के तहत यात्रियों को रिफंड और वैकल्पिक उड़ान जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है।
फ्लाइट रद्द होने पर क्या हैं आपके अधिकार?
डीजीसीए के नियमों के अनुसार, यदि खराब मौसम की वजह से फ्लाइट रद्द होती है तो एयरलाइन यात्रियों को दो विकल्प देने के लिए बाध्य है। पहला, टिकट का पूरा रिफंड और दूसरा, सीट उपलब्ध होने पर वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है।
लंबी देरी होने पर एयरलाइन को क्या देना होगा?
अगर उड़ान में लंबे समय तक देरी होती है तो एयरलाइन को यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। इसमें भोजन और पीने का पानी, जरूरत पड़ने पर होटल में ठहरने की व्यवस्था तथा एयरपोर्ट से होटल और होटल से एयरपोर्ट तक आने-जाने की सुविधा शामिल है।
ट्रैवल एजेंट से टिकट बुक करने पर किसकी होगी जिम्मेदारी?
अगर टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल के जरिए खरीदा गया है, तब भी रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी। डीजीसीए के मुताबिक, ट्रैवल एजेंट एयरलाइन के अधिकृत प्रतिनिधि होते हैं, इसलिए रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइन पर ही रहती है।
कितने दिनों में मिलेगा रिफंड?
नियमों के अनुसार, एयरलाइन को रिफंड की प्रक्रिया 14 कार्य दिवस के भीतर पूरी करनी होगी।
रिफंड के लिए कैसे करें आवेदन?
यात्री एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या कस्टमर केयर के जरिए रिफंड का अनुरोध कर सकते हैं। वहीं, यदि टिकट ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से लिया गया है तो आवेदन उसी माध्यम से करना होगा।
एयरलाइन मदद न करे तो कहां करें शिकायत?
यदि एयरलाइन समय पर रिफंड नहीं देती या नियमों के मुताबिक जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराती, तो यात्री पहले एयरलाइन के शिकायत निवारण तंत्र में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद भी समाधान नहीं मिलने पर एयर सेवा पोर्टल या संबंधित उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत की जा सकती है।