नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 23 लोगों को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, ये सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं और भारत में घुसपैठ, भर्ती, हथियारों की आपूर्ति, धन जुटाने, लॉजिस्टिक सहायता और आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर मोहम्मद मुसद्दिक का है।
कौन है मोहम्मद मुसद्दिक?
गृह मंत्रालय के मुताबिक, करीब 38 वर्षीय मोहम्मद मुसद्दिक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय ऑपरेटिव है। वह डॉक्टर, अब्दुल मनन, सज्जाद, हमजा और वाहिद खान समेत कई नामों से भी जाना जाता है। मंत्रालय के अनुसार, वह जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराने वाले प्रमुख हैंडलरों में शामिल रहा है।
राम जन्मभूमि परिसर समेत कई अहम ठिकानों की कराई थी रेकी
गृह मंत्रालय के अनुसार, मोहम्मद मुसद्दिक ने अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर, नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय और हरियाणा के पानीपत में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन रिफाइनरी की रेकी कराने में भी अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह जैश-ए-मोहम्मद की साइबर टीम का संचालन भी करता था, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती और संगठन के प्रचार-प्रसार में लगी रहती थी।
घुसपैठ से लेकर हथियार भेजने तक में निभाई भूमिका
मंत्रालय के मुताबिक, मुसद्दिक लासियाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर भी रहा है। उस पर सुरंगों और ड्रोन के जरिए भारत में हथियार एवं गोला-बारूद पहुंचाने का आरोप है। इसके अलावा उसे 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुंजवां में सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमले से भी जोड़ा गया है।
सरकार ने क्यों घोषित किया आतंकी?
सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसकी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क के खिलाफ अधिक प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य आतंकवाद के पूरे ढांचे को कमजोर करना और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाना है।
इन आतंकियों के नाम भी सूची में शामिल
मोहम्मद मुसद्दिक के अलावा मसूद इलियास कश्मीरी, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जिहादी समेत कई अन्य लोगों को भी व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है। लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के दामाद हाफिज खालिद वलीद का नाम भी इस सूची में शामिल है।
यूएपीए संशोधन के बाद मिला यह अधिकार
अगस्त 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला था। केंद्र सरकार ने दोहराया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति आगे भी जारी रहेगी और देश की सुरक्षा के लिए ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाती रहेगी।