वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E के गिराए जाने को लेकर एक नया और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। विमान के पायलट के बयान के बाद रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि दुर्घटना से ठीक पहले पायलट ने आसमान में एक ऐसे ड्रोन समूह को देखा था, जो किसी जेलीफिश जैसी संरचना में उड़ रहा था।
इस दावे ने आधुनिक युद्ध तकनीक को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक की भूमिका को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
3 अप्रैल को गिराया गया था अमेरिकी लड़ाकू विमान
जानकारी के अनुसार 3 अप्रैल को ईरान के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया गया था। यह घटना इसलिए भी अहम मानी गई क्योंकि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान पहली बार किसी अमेरिकी फाइटर जेट को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी।
घटना के बाद अमेरिकी विशेष बलों ने एक विशेष अभियान चलाकर पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित बाहर निकाला था। हालांकि अब तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से विमान गिरने के वास्तविक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।
पायलट ने किया रहस्यमयी ड्रोन संरचना देखने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार F-15E के पायलट ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने उड़ान के दौरान कई ड्रोन को एक-दूसरे से जुड़े हुए देखा था। उसके अनुसार इन ड्रोन के नीचे छोटे-छोटे ड्रोन भी मौजूद थे, जिससे पूरा ढांचा किसी जेलीफिश जैसा दिखाई दे रहा था।
पायलट ने बताया कि यह दृश्य इतना असामान्य था कि उसे किसी उन्नत और अज्ञात तकनीक जैसा महसूस हुआ। इसी बयान के बाद तथाकथित ‘जेलीफिश ड्रोन स्वार्म’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है जेलीफिश ड्रोन स्वार्म तकनीक?
विशेषज्ञों के अनुसार जेलीफिश ड्रोन स्वार्म एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें एक बड़े मदरशिप ड्रोन के साथ कई छोटे ड्रोन जुड़े रहते हैं। ये सभी ड्रोन एक विशेष नेटवर्क प्रणाली के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं और सामूहिक रूप से मिशन को अंजाम देते हैं।
दूर से देखने पर इनकी संरचना जेलीफिश जैसी दिखाई दे सकती है। इस तकनीक का उद्देश्य निगरानी, सूचना संग्रह और समन्वित हमलों को अधिक प्रभावी बनाना माना जाता है।
पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की ड्रोन तकनीक वास्तविक रूप से इस्तेमाल की जा रही है, तो यह पारंपरिक रडार और वायु रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हुए बड़े क्षेत्र की निगरानी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर एक साथ हमला भी कर सकते हैं।
यही वजह है कि पायलट के दावे के बाद सैन्य जगत में इस संभावित तकनीक को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
अभी तक नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि
हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और रक्षा अधिकारी इस दावे को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक दुर्घटना के समय पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ था, इसलिए उसके बयान की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
प्रारंभिक अटकलों में माना जा रहा था कि विमान को ईरान की वायु रक्षा प्रणाली या मिसाइल हमले से निशाना बनाया गया होगा। लेकिन पायलट के ताजा बयान ने जांच की दिशा को नया मोड़ दे दिया है।
युद्ध की बदलती तस्वीर पर दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में जेलीफिश ड्रोन स्वार्म जैसी तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह आधुनिक युद्ध प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां पायलट के दावे को लेकर क्या निष्कर्ष निकालती हैं और F-15E के गिरने की असली वजह क्या सामने आती है।