नई दिल्ली : बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग भी इस परेशानी से जूझ रहा है। कई लोग राहत के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन उनका असर सीमित समय तक ही रहता है। ऐसे में कुछ योगासन ऐसे हैं, जिन्हें रोजाना की दिनचर्या में शामिल कर पाचन तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है और एसिडिटी की समस्या से राहत पाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योगाभ्यास शरीर के पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद करता है। कुछ खास आसन गैस, अपच और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
वज्रासन से पाचन तंत्र को मिलती है मजबूती
वज्रासन उन चुनिंदा योगासनों में शामिल है, जिन्हें भोजन के बाद भी किया जा सकता है। हालांकि सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करने से पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। इस आसन के लिए घुटनों के बल बैठकर कूल्हों को एड़ियों पर टिकाएं, हाथ घुटनों पर रखें और रीढ़ को सीधा रखें। नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र सक्रिय बना रहता है।
पवनमुक्तासन गैस और कब्ज की समस्या में सहायक
पवनमुक्तासन पेट में जमा गैस को बाहर निकालने में मददगार माना जाता है। इसके लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और उन्हें छाती के पास लाएं। हाथों से घुटनों को पकड़ें और सांस छोड़ते हुए सिर को ऊपर उठाकर घुटनों की ओर ले जाने का प्रयास करें। यह आसन कब्ज कम करने और एसिड रिफ्लक्स की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है।
उष्ट्रासन से सीने और पेट को मिलता है खिंचाव
उष्ट्रासन का अभ्यास करने के लिए घुटनों के बल खड़े होकर धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकना होता है। इसके बाद दोनों हाथों से एड़ियों को पकड़कर गर्दन को पीछे की ओर ढीला छोड़ दिया जाता है। यह आसन छाती और पेट के हिस्से में खिंचाव पैदा करता है, जिससे पाचन तंत्र को लाभ पहुंच सकता है और सीने में जलन की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
मार्जरीआसन पाचन क्रिया को करता है सक्रिय
मार्जरीआसन के लिए हाथों और घुटनों के बल मेज जैसी स्थिति बनानी होती है। सांस लेते समय रीढ़ को नीचे की ओर झुकाकर सिर ऊपर उठाया जाता है, जबकि सांस छोड़ते समय रीढ़ को ऊपर की ओर गोल कर ठुड्डी को छाती से लगाया जाता है। यह आसन पेट के निचले हिस्से के अंगों को सक्रिय करता है और एसिडिटी बढ़ाने वाले कारणों को कम करने में मददगार माना जाता है।