आरा। बिहार के भोजपुर (आरा) का बिलौटी गांव इस वक्त एक बड़े सियासी और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन चुका है। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भरत तिवारी (Bharat Tiwari) के कथित फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ बुलाई गई महापंचायत में जनसैलाब उमड़ पड़ा है। ‘भरत तिवारी अमर रहें’ के गगनभेदी नारों के बीच आक्रोशित जनता सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) के इस्तीफे की मांग कर रही है।
इस बीच, महाराष्ट्र से बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस एनकाउंटर पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिहार सरकार को आईना दिखाते हुए कहा, “रामचरितमानस कहता है कि अगर कोई शरण में आ जाए तो उसका वध नहीं किया जाता। पुलिस ने सरेंडर के बाद गोली चलाई है।”
10 राज्यों से जुटी भीड़, महापंचायत में रो पड़े बेबस पिता
बिलौटी गांव के शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित इस महापंचायत में सिर्फ बिहार या उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत 10 राज्यों से हजारों लोग पहुंचे हैं। शाहपुर दियारांचल क्षेत्र से सैकड़ों गाड़ियों का काफिला इस सभा में शामिल होने पहुंचा।
भावुक कर देने वाला पल: महापंचायत के मंच पर जब भरत तिवारी के बुजुर्ग पिता काशीनाथ तिवारी पहुंचे, तो वह अपने आंसू नहीं रोक पाए और पागलों की तरह बिलख-बिलख कर रोने लगे। वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
प्रशांत किशोर महापंचायत में शामिल, रोहिणी आचार्या ने पूछा- ‘कहाँ है पोस्टमार्टम रिपोर्ट?’
जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पटना से सीधे बिलौटी गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद पीके खुद महापंचायत में बैठ गए हैं और न्याय की इस लड़ाई को धार दे रहे हैं।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्या ने इस एनकाउंटर पर एक बड़ा तकनीकी सवाल खड़ा कर दिया है। रोहिणी ने ट्वीट कर पूछा:
“भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? उसे क्यों छुपाया जा रहा है?”
रोहिणी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा रिटायर्ड हाई कोर्ट जज से न्यायिक जांच का ऐलान करना सिर्फ इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की एक सोची-समझी कवायद है।
अपनों के ही ‘असंतोष’ से घिरी सम्राट चौधरी सरकार
17 जून को हुए इस एनकाउंटर का वीडियो सामने आने के बाद नीतीश-सम्राट सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है।
- अपनों का ही विरोध: इस एनकाउंटर से विपक्ष तो हमलावर है ही, लेकिन सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अपने मंत्री और नेता भी अंदरखाने बेहद नाराज हैं।
- मानवाधिकार आयोग का नोटिस: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में बिहार पुलिस से जवाब तलब किया है।
- सुप्रीम कोर्ट में याचिका: मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में एक याचिका भी दाखिल की जा चुकी है।
यद्यपि आरोपी SDPO और थानाध्यक्ष समेत पूरी पुलिस टीम पर FIR दर्ज कर कई को सस्पेंड व लाइन हाजिर कर दिया गया है, लेकिन महापंचायत का मूड साफ कर रहा है कि जनता अब दोषियों की गिरफ्तारी और मुख्यमंत्री के इस्तीफे से कम पर मानने वाली नहीं है।